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सिर्फ 3 दिन बाकी... ट्रेड फेयर में लिट्टी चोखा के लिए मारामारी! विदेशी सामान को देख मोहित हुए लोग

deltin33 2025-11-25 04:06:43 views 767
  

44वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जागरण



स्टेट ब्यूरो, नई दिल्ली। 44वें इंटरनेशनल ट्रेड फेयर के खत्म होने में सिर्फ़ तीन दिन बचे हैं, ऐसे में अब वीकडेज़ में भी भीड़ बढ़ रही है। सोमवार को मेले में लगभग 70,000 (69,846) विज़िटर्स पहुंचे। हर हॉल और पवेलियन में अच्छी-खासी भीड़ दिखी। स्कूली बच्चे भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। खास बात यह है कि ज़्यादातर स्टॉल्स पर डिस्काउंट मिलने से विज़िटर्स अब शॉपिंग करते दिख रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हॉल नंबर 1 में विदेशी पवेलियन विज़िटर्स की पहली पसंद है। लोग कुछ नया देखने और खरीदने के लिए वहां आ रहे हैं। अफ़गान ड्राई फ्रूट्स, दुबई के लेडीज़ सूट, थाईलैंड के डेकोरेटिव फूल और फैंसी टर्किश लाइट्स खास तौर पर अट्रैक्टिव हैं। अलग-अलग राज्यों के पवेलियन भी सभी को अट्रैक्ट कर रहे हैं। यहां उन्हें हर राज्य के हैंडीक्राफ्ट्स मिलते हैं, और वे लोक कलाकारों और उनकी कला का भी मज़ा ले रहे हैं।

फूड कोर्ट में लोग राजस्थानी, पंजाबी और बिहारी खाने का भी मज़ा ले रहे हैं। बिहार का मशहूर लिट्टी चोखा भी पॉपुलर चॉइस बन गया है। बिहारी फ़ूड स्टॉल, दीदी की रसोई पर, मिस्टर लिट्टी वाला का लिट्टी चोखा खास तौर पर पसंद किया जा रहा है। देवेंद्र सिंह ने बताया कि सभी बिहारी स्टॉल पर लिट्टी चोखा की बहुत डिमांड है। लिट्टी चोखा के अलावा, अनरसा, लंगलाता, ठेकुआ और गुजिया भी पॉपुलर हैं।

मेले में आने वाले लोग घर के सामान की शॉपिंग के लिए हॉल 9, 10 और 11 में आ रहे हैं। सरस आजीविका मेले में भी काफी भीड़ देखी जा रही है। केले के चिप्स, रागी पापड़, चावल के पापड़, उड़द दाल और लहसुन के पापड़ सभी पॉपुलर हैं। कर्नाटक स्टॉल के नेचुरल फ़ूड आइटम भी दिल्ली वालों को बहुत पसंद आ रहे हैं। लोग अंजीर का हलवा, अनानास का हलवा, बादाम मिक्स हलवा, कुलथी दाल नमकीन, मूंगफली नमकीन, बेसन नमकीन और भी बहुत कुछ खरीद रहे हैं।
झारखंड पवेलियन में पारंपरिक पैतकर और सोहराई कला की विरासत देखें

इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में झारखंड पवेलियन इस साल कला, संस्कृति और कारीगरों को मज़बूत बनाने के लिए सबसे असरदार हब के तौर पर उभर रहा है। सोमवार को इंडस्ट्री सेक्रेटरी-कम-रेजिडेंट कमिश्नर अरवा राजकमल ने सभी स्टॉल्स का दौरा किया, उनकी तारीफ़ की और ज़रूरी गाइडेंस दी।

राज्य की समृद्ध लोक कलाएँ, खासकर पैतकर और सोहराई, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए सरकार की कोशिशें, देश भर से आने वाले विज़िटर्स का काफ़ी ध्यान खींच रही हैं। सोहराई, खोवर, जादोपटिया और पैतकर पेंटिंग न सिर्फ़ राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दिखाती हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की पीढ़ियों पुरानी कला को नए बाज़ार के मौकों से भी जोड़ती हैं।
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