सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, बदायूं। चार साल पुराने एक दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट सुयश प्रकाश श्रीवास्तव ने एक मुजरिम को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। उन्होंने उस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका है। अगर उसने जुर्माना जमा नहीं किया, तो उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
दातागंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का मामला
यह मामला दातागंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का है। यहां के एक व्यक्ति ने वर्ष 2021 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसका कहना था कि उसकी 18 वर्षीय बहन घर पर अकेली थी। सर्दियों का मौसम था। रात को करीब आठ बज रहे थे और उसकी बहन घर में पशुओं को चारा डाल रही थी। उस वक्त परिवार के लोग घर में मौजूद नहीं थे। इसका फायदा उठाकर गांव का आरोपित जाने अली उर्फ जाने आलम उसके घर में घुस आया था और उसने युवती को पीछे से पकड़ लिया था। उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। जब उसने शोर मचाया तो आरोपित मौके से फरार हो गया।
न्यायालय ने आरोपित पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी ठाेंका
इसमें पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना की और आरोपित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बताया जा रहा है कि पीड़िता अनुसूचित जाति की थी, जिससे आरोपित पर एससी−एसटी एक्ट भी लगाया गया था। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपित जाने अली उर्फ जाने आलम को दोषी ठहराते हुए घर में घुसकर दुष्कर्म करने के आरोप में 10 साल की सजा सुनाई और उस पर 35 हजार रुपये जुर्माना भी डाला है। इसकी सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से जाति प्रमाण पत्र दाखिल नहीं किया गया था, जिससे उसकी जाति स्पष्ट नहीं हो पाई। इससे न्यायालय ने मुजरिम को एससी एसटी एक्ट दोष मुक्त कर दिया। |