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National Epilepsy Day 2025: मिर्गी को लेकर समाज में फैले हैं ये 7 भ्रम, डॉक्टर बता रहे हैं हकीकत

cy520520 2025-11-17 17:37:32 views 808
  

National Epilepsy Day 2025: डॉक्टर ने दूर करे मिर्गी से जुड़े 7 मिथक (Image Source: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मिर्गी के बारे में फैली गलत धारणाएं आज भी लोगों के मन में डर और झिझक पैदा करती हैं। इन मिथकों के कारण न सिर्फ इलाज में देरी होती है, बल्कि मिर्गी से जूझ रहे लोगों की सोशल और पर्सनल लाइफ भी प्रभावित होती है। बता दें, सही जानकारी और समझ इस बीमारी को बेहतर ढंग से संभालने में बड़ी मदद कर सकती है। ऐसे में आइए, डॉ. अमित बत्रा से जानते हैं ऐसे ही 7 मिथकों की सच्चाई, जो मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

  
मिथक: हर दौरा जोरदार झटकों के रूप में ही होता है

जब हम मिर्गी के दौरे की बात करते हैं, तो अक्सर दिमाग में तेज झटकों, शरीर के अकड़ने और बेहोशी का दृश्य आ जाता है, लेकिन सच यह है कि दौरे कई तरह के होते हैं। कई दौरे बेहद हल्के होते हैं- अचानक घबराहट, थोड़ी देर के लिए होश खोना, अजीब-सा एहसास या एक जैसी हरकतें दोहराते रहना। इन सूक्ष्म लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है, क्योंकि इन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे इलाज में देरी होती है।
मिथक: मिर्गी किसी अलौकिक कारण से होती है

मिर्गी पूरी तरह न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। यह दिमाग में होने वाली असामान्य विद्युत गतिविधियों के कारण होती है, बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी वायर में अचानक शॉर्ट सर्किट हो जाए। तनाव, नींद की कमी या डर कुछ लोगों में दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं, लेकिन ये मिर्गी का कारण नहीं होते। असल कारणों में सिर की चोट, दिमागी संक्रमण, स्ट्रोक, ट्यूमर, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या दिमाग की किसी संरचनात्मक समस्या शामिल हो सकती है।
मिथक: मिर्गी वाले लोग सामान्य जीवन नहीं जी सकते

यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। सही दवाओं या जरूरत हो तो सर्जरी की मदद से ज्यादातर मरीज अपने दौरे लगभग पूरी तरह नियंत्रित कर लेते हैं। वे पढ़-लिख सकते हैं, नौकरी कर सकते हैं, ट्रैवल कर सकते हैं, परिवार संभाल सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं- कुछ खास सावधानियों जैसे तैराकी या पैराग्लाइडिंग से बचने के साथ। आज की आधुनिक दवाएं सुरक्षित और प्रभावी हैं, जिससे अधिकतर लोग अपनी दिनचर्या बिल्कुल सामान्य रूप से निभा पाते हैं।
मिथक: दौरे के दौरान व्यक्ति के मुंह में कुछ डालें

यह न केवल गलत है बल्कि बहुत खतरनाक भी हो सकता है। कभी भी दौरा पड़ रहे व्यक्ति को जोर से न पकड़ें और न ही उनके मुंह में कोई वस्तु (चम्मच, चाबी, उंगली आदि) डालें। सही तरीका यह है कि उन्हें चोट लगने वाली जगहों से दूर ले जाएं, धीरे से करवट पर लिटा दें और दौरे के शांत होने तक पास में रहें।
मिथक: मिर्गी छूने या पास रहने से फैलती है

मिर्गी संक्रामक नहीं है। अगर किसी को मिर्गी है, तो उससे न तो यह बीमारी फैलती है और न ही इसके लक्षण। हां, कुछ संक्रमण जैसे वायरल इन्फेक्शन या टीबी पर्यावरण से मिल सकते हैं और आगे चलकर दिमाग पर असर डाल सकते हैं, लेकिन मिर्गी खुद किसी से नहीं फैलती।
मिथक: वीडियो गेम, तेज रोशनी या स्क्रीन हमेशा दौरे को ट्रिगर करते हैं

ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि चमकती लाइट या स्क्रीन मिर्गी के दौरे का कारण बनती है, जबकि यह केवल बहुत कम प्रतिशत लोगों में होता है। सिर्फ लगभग 3% मिर्गी रोगियों को तेज, बदलती रोशनी या लंबे समय तक स्क्रीन देखने से समस्या हो सकती है। इसलिए, सामान्य परिस्थितियों में स्क्रीन देखना या गेम खेलना पूरी तरह सुरक्षित होता है- बस जरूरत के अनुसार ब्रेक लेना चाहिए।
मिथक: मिर्गी वाले लोग गाड़ी नहीं चला सकते

सही उपचार और दवाइयों के नियमित सेवन से जब दौरे नियंत्रित हो जाते हैं, तो कई लोग गाड़ी चला सकते हैं। हालांकि, हर देश के अपने कानून होते हैं जो तय करते हैं कि किन परिस्थितियों में मिर्गी वाले व्यक्ति को ड्राइविंग लाइसेंस दिया जा सकता है। यह नियम सभी की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं, ताकि गाड़ी चलाते समय अचानक दौरा पड़ने का खतरा कम हो। रात के समय लंबी ड्राइव्स से बचना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

मिर्गी एक ऐसी स्थिति है जिसे समझने की जरूरत है, उससे डरने की नहीं। सही जानकारी, जागरूकता और समय पर इलाज न केवल मरीज की जिंदगी आसान बनाते हैं, बल्कि समाज में फैली गलत धारणाओं को भी खत्म करते हैं। जब हम मिथकों के बजाय विज्ञान पर भरोसा करते हैं, तभी मिर्गी से जुड़ा डर, शर्म और भेदभाव कम हो पाता है और लाखों लोग एक सामान्य, सम्मानजनक और खुशहाल जीवन जी पाते हैं।

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