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विधानसभा की लंबी पारियों में जुड़ा एक और अनोखा रिकॉर्ड, यह चुनाव बना मिसाल

deltin33 2025-11-17 13:07:33 views 444
  

बिहार विधानसभा चुनाव



राजेश चंद्र मिश्र, पटना। दिग्गजों के राजनीतिक कद का आकलन लंबी संसदीय पारी से भी होता है। हालांकि, आकलन का यह एकमात्र पैमाना नहीं और पिछली सदी के उतरार्द्ध के बाद से तो बिल्कुल ही नहीं। कारण राजनीति में व्यक्तित्व व छवि के महत्व का कमतर होते जाना है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

राजनेताओं को इसकी चिंता भी नहीं रही, क्योंकि अब जीत की गारंटी पार्टियों और वोटों के गुणा-गणित से मिलती है। प्रत्याशियों के व्यक्तित्व अपेक्षाकृत गौण हो गया है। इसके बावजूद लगातार जीत दर्ज कराने वाले या लंबी पारी का रिकॉर्ड बनाने वाले राजनेता चर्चा में आ ही जाते हैं। इस संदर्भ में नालंदा का महत्व अप्रतिम है।

पहले यह चर्चा राजगीर से लंबे समय तक विधायक रहे सत्यनारायण आर्य के नाम से शुरू होती थी और अब हरिनारायण सिंह की उपलब्धि से, जो दसवीं बार विधानसभा चुनाव में विजयी रहे हैं। वे बिहार में दस बार विधायक चुने जाने के एकमात्र उदाहरण हैं। इसमें हरनौत से उनकी लगातार चौथी जीत उल्लेखनीय है।

नालंदा जिला के ही इस विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विधायी पारी का भी इतिहास जुड़ा हुआ है। नीतीश इसी सीट से दो बार (1985 व 1995) जीते और दो बार (1977 व 1980) हारे हैं। पिछली बार अगर रमई राम बोचहां में पराजित नहीं हुए होते तो हरिनारायण से पहले दस बार विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो गया होता।

मुजफ्फरपुर जिला के बोचहां में 2020 में उन्हें विकासशील इंसान पार्टी के मुसाफिर पासवान ने पराजित कर दिया था। उस चुनाव के बाद उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन नाम के साथ नौ बार विधायक चुने जाने का रिकार्ड कायम है।

यही रिकॉर्ड कहलगांव से विधायक रहे सदानंद सिंह के नाम भी है। अब इस सूची में भाजपा के प्रेम कुमार भी अपना नाम दर्ज करा रहे हैं, जिनकी अब तक निर्बाध नौ जीत का डंका गया शहरी विधानसभा क्षेत्र में बजा है। वे 1990 से विधायक हैं।

सुपौल में इस बार की जीत के साथ यही उपलब्धि बिजेंद्र यादव भी अपने खाते में दर्ज करा रहे। नालंदा से श्रवण कुमार आठवीं बार विधायक चुने गए हैं। मधेपुरा जिला की आलमनगर सीट से विजयी रहे नरेंद्र नारायण यादव का भी यही रिकार्ड है। दोनों की अब तक की जीत निर्बाध रही है।

भोजपुर जिला में बड़हरा से राघवेंद्र प्रताप सिंह की भी विधानसभा में आठवीं पारी है। पटना जिला की पटना साहिब सीट से नंदकिशोर यादव लगातार सात बार विधायक रहे हैं। इस बार भाजपा ने उन्हें मैदान में नहीं उतारा। सातवीं बार विधायक चुने गए विजय कुमार चौधरी और श्याम रजक की जीत-हार में अंतराल रहा है। चौधरी समस्तीपुर में सरायरंजन और रजक पटना में फुलवारी से विजयी रहे हैं।

पटना जिला में ही फतुहा सीट से राजद के टिकट पर रामानंद यादव की भी इस बार सातवीं जीत है। यही रिकार्ड बांका में भाजपा के रामनारायण मंडल के खाते में दर्ज हो रहा है।

परिवार और रिकार्ड गया जिला में इमामगंज सीट से जीतन राम मांझी आठ बार विधायक चुने गए। 2024 में सांसद चुन लिए जाने के बाद उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। उसके बाद उप चुनाव में उनकी बहू दीपा कुमारी विजयी रहीं। इस बार भी दीपा ही जीती हैं।


गया जिला में ही बेलागंज से सुरेंद्र यादव लगातार आठ बार विधायक रहे। 2024 में सांसद चुन लिए जाने के बाद उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। उसके बाद उप चुनाव में उनके पुत्र विश्वनाथ कुमार सिंह पराजित हो गए। विश्वनाथ इस बार भी हार गए हैं।
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