search

Bihar News : मिथिला, मैथिली और मिथिलांचल से पीएम मोदी का खास जुड़ाव

deltin33 2025-11-16 21:07:32 views 1082
  

पीएम मोदी की यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।






मृत्युंजय भारद्वाज, दरभंगा । बिहार के मिथिला, मैथिली और मिथिलांचल से पीएम मोदी का जुड़ाव सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं, संस्कृति, भावना और पहचान का ऐसा संगम बन गया है जिसने पूरे अभियान को ‘मिथिला-मय’ कर दिया।

जनसभाओं में मैथिली के शब्दों की गर्माहट हो या कलाकारों के पारंपरिक स्वागत में झलकती लोक-गंध-मोदी हर मंच पर ऐसे दिखे मानो मिथिला की मिट्टी से कोई आत्मीय रिश्ता निभा रहे हों।

बिहार विधानसभा चुनाव में पहले दिन से लेकर परिणाम तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मिथिला, मैथिली और मिथिलांचल को ऊंचाई दी।

हर मंच से मिथिला का बखान किया। प्रधानमंत्री ने चुनाव में प्रचार अभियान की शुरुआत 24 अक्टूबर को समस्तीपुर से की थी।
पाग और चादर और भगवान सूर्य की मूर्ति देकर स्वागत

यहां केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने पाग और चादर के अलावा भगवान सूर्य की मूर्ति देकर स्वागत किया तो सांसद शांभवी ने मिथिला पेंटिंग से सुसज्जित छठ की सूप भेंट की थी।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

आठ नवंबर को सीतामढ़ी में संबोधन के दौरान उन्होंने स्वयं को मिथिला पेंटिंग का ब्रांड एंबेसडर बताया। 14 नवंबर को परिणाम के दिन भी दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय से संबोधन के दौरान मिथिला पेंटिंग वाला दोपट्टा गले में लपेटे रहे।

बाद में तो उन्होंने हवा में भी लहराया भी। इस दौरान उन्हें मखाने का माला भी पहनाई गई। इस चुनाव में उन्होंने मिथिला की सभ्यता एवं संस्कृति को गौरवान्वित किया। उत्तर बिहार में प्रधानमंत्री की चार सभाएं हुई थीं, सभी जगह मिथिला की परंपरा से उनका स्वागत किया गया था।
अन्य नेता-अभिनेता भी मिथिला के रंग में दिखे

पूर्व प्राचार्य एवं समाजशास्त्री डा. विद्यानाथ झा कहते हैं, प्रधानमंत्री के अपनत्व से परंपरा और संस्कृति का सम्मान करने वाले मिथिलांचल के लोगों को एनडीए के साथ भावनात्मक जुड़ाव हुआ।

वोटिंग नेचर में भी यह फैक्टर रहा। आप परिणाम देख लीजिए, दरभंगा की 10 में 10, समस्तीपुर की 10 में सात, मधुबनी की 10 में नौ एवं बेगूसराय की सात में पांच पर एनडीए के घटक दलों को जीत मिली।

प्रधानमंत्री ने परिणाम के बाद लोगों से कहा कि मखाने की खीर खाइए। इसका अभिप्राय समझिए। मखाने की खीर उत्सव का प्रतीक है। पहले मखाने को लोग इस तरह से नहीं जानते थे। प्रधानमंत्री ने इसे बहुप्रचारित किया।

राजनीतिक विश्लेषक डा. अनंतदेव नारायण सिंह कहते हैं कि पूरे चुनाव में मंच पर बिहार की परंपरा व संस्कृति छाई रही। उसमें मिथिला ही सर्वोपरि रही। राष्ट्रीय नेता से लेकर स्थानीय एवं अभिनेता तक की चुनावी सभा में न सिर्फ इस पर बात हुई, बल्कि स्वागत सत्कार एवं उपहार में इन्हें गौरवान्वित किया गया।
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
471300