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बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए जनहित याचिका दायर, सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग

Chikheang 2025-11-7 01:08:47 views 1195
  

बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए जनहित याचिका दायर।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

याचिका ल्यूक क्रिस्टोफर काउटिन्हो द्वारा दायर की गई है और इसमें केंद्र, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, नीति आयोग और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र की सरकारों को पक्षकार बनाया गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
वायु प्रदूषण संकट पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के स्तर तक पहुंचा- याचिका

याचिका में कहा गया है कि वर्तमान वायु प्रदूषण संकट \“\“पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी\“\“ के स्तर तक पहुंच गया है और इससे लोगों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन करता है।
वायु प्रदूषण को नेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया जाए- याचिका

इसमें एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि अकेले दिल्ली में करीब 22 लाख स्कूली बच्चों को फेफड़ों को इतना नुकसान हो चुका है कि उनकी रिकवरी मुश्किल है। याचिका वायु प्रदूषण को नेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने और इसके लिए समयबद्ध राष्ट्रीय कार्य योजना बनाने की मांग की गई है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि 2019 में शुरू किया गया राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) अपने लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहा है। दिल्ली में 22 लाख स्कूल के बच्चों को पहले ही अपरिवर्तनीय फेफड़ों की क्षति हो चुकी है। याचिका में वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को सुधारने और एक राष्ट्रीय कार्य बल की स्थापना की भी मांग की गई है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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