search

AI का बढ़ता दायरा, 2030 तक भारत में 1.8 करोड़ नौकर ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 90

नई दिल्ली: कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि इसे रोजमर्रा के कामकाज का हिस्सा बना रही हैं। इसका सबसे बड़ा प्रभाव उन नौकरियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जो ऑफिस में बैठकर की जाती हैं और जिन्हें सामान्यतः व्हाइट कॉलर जॉब्स कहा जाता है। कई कंपनियां ऐसे कार्यों को भी AI सिस्टम से करवाने लगी हैं, जिन्हें पहले पूरी तरह इंसान संभालते थे। इससे कामकाज की प्रक्रिया तेज तो हो रही है, लेकिन रोजगार संरचना में बड़े बदलाव की चर्चा भी तेज हो गई है।




1.8 करोड़ नौकरियों पर असर

इस विषय पर हाल ही में एक पॉडकास्ट में मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी सर्विसनाउ की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक AI ऑटोमेशन के कारण भारत में लगभग 1.8 करोड़ नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि इस दौरान नई तकनीकी भूमिकाओं में केवल लगभग 30 लाख नई नौकरियां ही पैदा हो सकती हैं। इस तरह कुल मिलाकर करीब 1.5 करोड़ नौकरियों के प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। हालांकि रिपोर्ट की भाषा में यह भी कहा गया है कि इनमें से कई भूमिकाएं पूरी तरह समाप्त नहीं होंगी, बल्कि उन्हें AI के साथ मिलकर नए रूप में परिभाषित किया जाएगा। यानी कई काम इंसानों से हटकर मशीनों और सॉफ्टवेयर के सहयोग से किए जाएंगे।




सौरभ मुखर्जी की चेतावनी

सौरभ मुखर्जी ने इस बदलाव को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में यह उथल-पुथल उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल टेक्नोलॉजी सेक्टर में जो छंटनी और बदलाव देखने को मिल रहे हैं, वे सिर्फ शुरुआती संकेत हैं। उनके अनुसार, “यह तो सिर्फ ट्रेलर है।” उन्होंने कहा कि जब AI पूरी तरह से डिजिटल कामों को इंसानों जैसी दक्षता से करने में सक्षम हो जाएगा, तब इसका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक होगा।




मुखर्जी ने यह भी कहा कि AI पहले ही कोडिंग जैसे कई कामों में लगभग 50 प्रतिशत इंसानी स्तर की विश्वसनीयता हासिल कर चुका है। उनका अनुमान है कि अगले दो से तीन वर्षों में यह तकनीक 90 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक सटीकता के साथ कई डिजिटल कार्य करने लगेगी।
बड़ी टेक कंपनियों का AI पर भारी निवेश

AI के तेजी से विकास के पीछे वैश्विक तकनीकी दिग्गज कंपनियों का भारी निवेश भी एक बड़ा कारण है। माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, अल्फाबेट, एप्पल और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पूंजी लगा रही हैं। सौरभ मुखर्जी के अनुसार, इन कंपनियों ने पिछले 12 महीनों में AI पर अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर को लगभग दोगुना कर दिया है। इस निवेश में AI इंफ्रास्ट्रक्चर, चिप्स, डेटा सेंटर और बड़े भाषा मॉडल (LLM) के प्रशिक्षण पर भारी खर्च शामिल है। उनका दावा है कि इन कंपनियों ने मिलकर लगभग 800 अरब डॉलर AI क्षेत्र में खर्च किए हैं, जो भारत की GDP के करीब 25 प्रतिशत के बराबर है।




AI से बढ़ती आय

जहां एक ओर AI पर भारी निवेश हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे होने वाली आय में भी तेज वृद्धि देखी जा रही है। सौरभ मुखर्जी ने बताया कि हाल के महीनों में AI आधारित सेवाओं से राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर एंथ्रोपिक कंपनी का उल्लेख किया और कहा कि उसके क्लाउड AI प्लेटफॉर्म से जुड़ा एंटरप्राइज रेवेन्यू 2025 की शुरुआत में लगभग 1 अरब डॉलर था, जो मात्र 15 महीनों में बढ़कर करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि AI न केवल खर्च का क्षेत्र है, बल्कि यह तेजी से एक बड़े राजस्व स्रोत के रूप में भी उभर रहा है।

भारत के GCC सेक्टर में AI अपनाना

EY की एक रिपोर्ट के हवाले से यह भी सामने आया है कि भारत में स्थित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) तेजी से AI तकनीक अपना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 58 प्रतिशत GCC पहले से ही ‘एजेंटिक AI’ में निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा 80 प्रतिशत से अधिक केंद्र जनरेटिव AI तकनीक का उपयोग या उसमें निवेश कर रहे हैं। यह दिखाता है कि कॉरपोरेट सेक्टर में AI को लेकर अपनाने की गति काफी तेज है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि GCC में लगभग 24 प्रतिशत काम ऐसे हैं जिन्हें पूरी तरह ऑटोमेट किया जा सकता है, जबकि 42 प्रतिशत काम AI की मदद से काफी हद तक बेहतर किए जा सकते हैं।

रोजगार संरचना में बड़े बदलाव

विशेषज्ञों का मानना है कि AI के बढ़ते उपयोग से रोजगार की प्रकृति बदल जाएगी। जहां कुछ पारंपरिक भूमिकाएं कम हो सकती हैं, वहीं नई तकनीकी और डेटा आधारित भूमिकाओं की मांग बढ़ेगी। हालांकि चिंता यह भी है कि बदलाव की गति इतनी तेज हो सकती है कि उससे श्रम बाजार में असंतुलन पैदा हो जाए। खासकर उन क्षेत्रों में जहां दोहराए जाने वाले डिजिटल कार्य अधिक होते हैं।
भविष्य की तैयारी पर जोर


AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि कौशल विकास और पुनः प्रशिक्षण (reskilling) पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को बदलती तकनीक के साथ खुद को ढालना होगा। फिलहाल AI को लेकर उत्साह और चिंता दोनों ही साथ-साथ चल रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक रोजगार और कामकाज की दुनिया को गहराई से बदलने वाली है।






Editorial Team



artifical Intelligence EffectAI Impact in Jobs of IndiaSaurabh MukherjeaAI AutomationNew Jobs In India









Next Story
like (0)
deltin55administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin55

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

12

Posts

1410K

Credits

administrator

Credits
148078