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ओडिशा दिवस : 'कलिंग' की भूमि का सांस्कृतिक स् ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 10

नई दिल्ली। भारत के पूर्वी तट पर बसा ओडिशा सिर्फ एक राज्य नहीं है। यह इतिहास, संस्कृति और आत्मगौरव की एक जीवंत गाथा है। हर साल 1 अप्रैल को मनाया जाने वाला ओडिशा स्थापना दिवस, जिसे उत्कल दिवस भी कहा जाता है, इस भूमि के उस गौरवशाली क्षण की याद दिलाता है, जब 1936 में यह एक स्वतंत्र प्रांत के रूप में अस्तित्व में आया।   
ओडिशा का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रहा है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र 'कलिंग' के नाम से जाना जाता था, जो अपनी शक्ति और समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध था।  




भारत के पूर्वी हिस्से में बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित यह प्रदेश मौर्य, गुप्त, शुंग और गजपति जैसे शक्तिशाली राजवंशों के अधीन रहा। इतिहासकारों के अनुसार, इसी धरती पर कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने अहिंसा और धर्म का मार्ग अपनाने की प्रेरणा पाई। ब्रिटिश शासन के दौरान ओडिशा बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था। इसे बाद में बिहार और ओडिशा प्रांत के रूप में पुनर्गठित किया गया।   
लेकिन, स्थानीय लोगों और समाज सुधारकों के लंबे संघर्ष के बाद 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा को एक अलग प्रांत का दर्जा मिला। यह भारत का पहला राज्य था जिसे भाषा के आधार पर गठित किया गया। यही कारण है कि उत्कल दिवस न केवल एक ऐतिहासिक तिथि है, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक भी है।  




स्वतंत्रता के बाद 1949 में रियासतों के विलय के साथ ओडिशा का पूर्ण रूप से एकीकृत राज्य के रूप में गठन हुआ। इस भूमि को कलिंग, उत्कल और उद्र जैसे कई नामों से जाना जाता रहा है, लेकिन इसकी पहचान सबसे अधिक भगवान जगन्नाथ की भूमि के रूप में है। भगवान जगन्नाथ यहां के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन के केंद्र में हैं और पुरी की रथ यात्रा विश्वभर में आस्था और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है।  
ओडिशा भौगोलिक रूप से एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह उत्तर में झारखंड, उत्तर-पूर्व में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में आंध्र प्रदेश और पश्चिम में छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है, जबकि पूर्व में बंगाल की खाड़ी इसकी प्राकृतिक सीमा बनाती है। यह समुद्री तट, हरे-भरे जंगल, झरने और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। इस प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान भी उतनी ही समृद्ध है। ओड़िया यहां की प्रमुख भाषा है। रथ यात्रा, दुर्गा पूजा, मकर संक्रांति, उगादी और उडान उत्सव जैसे त्योहार यहां के जीवन में रंग भरते हैं। विश्वभर में प्रसिद्ध ओडिसी नृत्य इस राज्य की कलात्मक उत्कृष्टता का प्रतीक है। भुवनेश्वर के मंदिर, कोणार्क का सूर्य मंदिर और पुरी का जगन्नाथ मंदिर इस प्रदेश की भव्य सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं।  
ओडिशा आज विकास की ओर अग्रसर है। खनिज संसाधनों की प्रचुरता के कारण इसे भारत का खनिज राज्य कहा जाता है। यहां की अर्थव्यवस्था कृषि, खनन और पर्यटन पर आधारित है। ये तीनों क्षेत्र राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और समुद्री तटों के कारण यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी बन चुका है। 2011 में इस प्रदेश का नाम 'उड़ीसा' से 'ओडिशा' किया गया।






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