भारत के कई हिस्सों, खासकर उत्तर और पश्चिमी राज्यों में, फरवरी के ठंडे मौसम के बाद मार्च की शुरुआत में ही अचानक तेज गर्मी महसूस होने लगी है। कई जगहों पर तापमान सामान्य से 8 से 13 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है, जिसे मौसम वैज्ञानिक हीटवेव जैसी स्थिति मान रहे हैं। हालांकि, फरवरी में इस तरह की गर्मी तीन साल पहले भी देखी गई थी, लेकिन मार्च की शुरुआत में इतनी जल्दी गर्मी आना आम बात नहीं मानी जाती।
भारत के मौसम विभाग (IMD) ने मार्च के लिए अपने अनुमान में पहले ही कहा था कि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, मध्य भारत और प्रायद्वीपीय भारत में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है।
मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी थी कि गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से ज्यादा हीटवेव के दिन देखे जा सकते हैं। मार्च के पहले ही हफ्ते में यह अनुमान सही साबित होता नजर आया।
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हिमाचल में भी बढ़ा तापमान
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी तापमान असामान्य रूप से बढ़ गया है। राज्य की राजधानी शिमला में तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया।
मौसम विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, शिमला में मार्च के महीने में तापमान का 25 डिग्री से ऊपर जाना लगभग असंभव माना जाता है। आमतौर पर यहां गर्मी का चरम मई और जून की शुरुआत में होता है और हीटवेव जैसी स्थिति बहुत कम देखने को मिलती है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी गर्मी
पिछले हफ्ते जम्मू कश्मीर और लद्दाख में भी तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय मोहपात्रा के अनुसार, यह ज्यादा तापमान अगले 2–3 दिनों तक रह सकता है। उसके बाद आने वाला वेस्टर्न डिस्टर्बेंस तापमान को कुछ कम कर सकता है।
क्या होता है वेस्टर्न डिस्टर्बेंस?
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ऐसे मौसम तंत्र होते हैं, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हैं और बारिश या बर्फबारी लाते हैं। ये सिस्टम ईरान के आसपास के क्षेत्रों से बनते हैं और भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से नमी लेकर भारत तक पहुंचते हैं। सर्दियों के मौसम में ये अक्सर सक्रिय रहते हैं और उत्तर भारत में बारिश व बर्फबारी कराते हैं।
सूखी सर्दी भी बनी वजह
इस साल सर्दियों में बारिश काफी कम हुई। फरवरी का महीना 1901 के बाद तीसरा सबसे सूखा फरवरी रहा। जनवरी और फरवरी में पूरे भारत में सिर्फ 16 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से करीब 60% कम है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक नवंबर 2025 से पर्याप्त वेस्टर्न डिस्टर्बेंस नहीं आए, जिससे सर्दियों में बारिश और बर्फबारी कम हुई। इसके अलावा समुद्र से नमी लाने वाली हवाओं का सही मिलन भी नहीं हो पाया।
सूखी जमीन से जल्दी बढ़ती है गर्मी
जब सर्दियों में बारिश कम होती है, तो जमीन सूखी रह जाती है। ऐसी स्थिति में धूप पड़ते ही जमीन जल्दी गर्म हो जाती है। अगर मिट्टी में नमी होती है, तो पहले वह नमी भाप बनकर उड़ती है, जिससे गर्मी धीरे-धीरे बढ़ती है। लेकिन सूखी जमीन होने पर तापमान तेजी से बढ़ने लगता है।
फसलों पर पड़ सकता है असर
अचानक बढ़ी गर्मी का सबसे ज्यादा असर रबी की खड़ी फसलों पर पड़ सकता है। इसमें सरसों, गेहूं, चना, मूंगफली, तिल, ज्वार और कुसुम जैसी फसलें शामिल हैं।
इसके अलावा आलू जैसी सब्जियां और सेब जैसे फलों की फसल को भी अतिरिक्त देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में समय-समय पर सिंचाई करें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।
हालांकि ज्यादा सिंचाई करने से कई इलाकों में पानी के संसाधनों पर दबाव भी बढ़ सकता है। इसलिए मौसम की इस असामान्य स्थिति को लेकर किसान और वैज्ञानिक दोनों सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
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