Israel US-Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भारी तनाव के बीच भारत सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के मिशन में जुटी हुई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को जानकारी दी कि 1 मार्च से 7 मार्च के बीच खाड़ी क्षेत्र में फंसे 52,000 से अधिक भारतीय कमर्शियल उड़ानों के जरिए सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष को देखते हुए यह एक बड़ी राहत की खबर है।
हवाई मार्ग से सुरक्षित रेस्क्यू
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, युद्ध प्रभावित क्षेत्र से भारतीयों को लाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। 1 से 7 मार्च के बीच कुल 52,107 भारतीय सुरक्षित भारत आ चुके है। इनमें से 32,107 यात्रियों ने एयर इंडिया और इंडिगो जैसे भारतीय विमानों का सहारा लिया, जबकि बाकी अन्य विदेशी एयरलाइंस से आए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में और अधिक उड़ानों की योजना बनाई गई है ताकि कोई भी भारतीय वहां फंसा न रहे।
ट्रांजिट यानी किसी और देश की यात्रा के दौरान बीच में मिडिल ईस्ट में रुके हुए थे जो युद्ध के बीच वहां फंस गए हैं।
शॉर्ट-टर्म विजिट पर खाड़ी देशों में गए थे।
युद्ध क्षेत्र के करीब स्थित बंदरगाहों या रिहायशी इलाकों में रह रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों में मिडिल ईस्ट के कुछ हिस्सों में हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से खोले जाने के बाद उड़ानों में तेजी आई है। भारतीय और विदेशी दोनों एयरलाइंस अब नॉन-शेड्यूल्ड उड़ानें भी संचालित कर रही हैं। भारत सरकार न केवल अपने 1 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा बल्कि ऊर्जा (तेल) और व्यापार की सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत कर रही है।
मदद के लिए 24x7 काम कर रहा हेल्पलाइन और Embassy
विदेश मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट में रह रहे सभी भारतीयों के लिए जरूरी निर्देश जारी किए हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे वहां के स्थानीय अधिकारियों के दिशा-निर्देशों और भारतीय दूतावास की एडवायजरी का सख्ती से पालन करें। सभी खाड़ी देशों में भारतीय मिशनों ने चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। सरकार ने दोहराया है कि पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की भलाई उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति बिगड़ने पर \“ऑपरेशन अजय\“ जैसे और भी बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।