Israel-US Iran War: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सोमवार (2 मार्च) को कहा कि भारत सभी विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री ने कनाडा के साथ अहम समझौतों पर हस्ताक्षर के बाद अपने बयान में यह बात कही। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि पीएम मोदी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश भी दिया है कि वे ताजा घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
पीएम मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत सभी विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है।“ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।
PM मोदी ने आगे कहा, “भारत और कनाडा लोकतांत्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास रखते हैं। विविधता का सम्मान और मानवता का कल्याण हमारी साझा दृष्टि है। आज हमने इस दृष्टि को साझेदारी की नयी ऊंचाई देने पर चर्चा की।“ दोनों देशों ने रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री क्षेत्र में निगरानी क्षमता बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
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इस दौरान आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ से मुकाबले में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये चुनौतियां दोनों देशों और पूरी मानवता के लिए गंभीर हैं। साथ ही कहा कि वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए इनसे मिलकर निपटना जरूरी है।
भारतीयों को वापस लाने के लिए केंद्र तैयार
इस बीच, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश स्थित भारतीय मिशनों के संपर्क में है। एक बयान में जोशी ने कहा कि संघर्ष के कारण प्रभावित लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित भारतीय दूतावासों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की गई है।
उन्होंने कहा, “जब भी कन्नड़ भाषी और अन्य भारतीय दुनिया में कहीं भी संकट का सामना करते हैं केंद्र सरकार उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करती है। इससे पहले, हम यूक्रेन में फंसे लोगों को वापस लाए थे। भारतीय जहां भी हों, उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।“ जोशी ने कहा कि ईरान-इजराइल संघर्ष की गंभीरता के कारण कन्नड़ भाषी लोगों के परेशानी में फंसे होने की सूचना मिली है। उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने हेतु वरिष्ठ मंत्रियों के साथ तत्काल परामर्श किया गया है।
चिंतित परिवारों को आश्वस्त करते हुए मंत्री ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में हवाई यात्रा करना फिलहाल जोखिम भरा है। भविष्य में किसी भी तरह के कदम उठाने से पहले जानकारों से सलाह लिया जा रहा है।
पीएम मोदी ने की हाईलेवल बैठक
इससे पहले कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति की समीक्षा की। साथ ही क्षेत्र में रहने वाले बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश भी दिया है कि वे घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक एवं व्यवहार्य कदम उठाएं।
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में रविवार रात हुई बैठक में सीसीएस ने संघर्ष की स्थिति को शीघ्र समाप्त करने और संवाद एवं कूटनीति के जरिए मामले का हल निकालने के महत्व पर भी जोर दिया। सीसीएस देश के सुरक्षा संबंधी और रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सीसीएस ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति की समीक्षा करने के लिए बैठक की। इस दौरान उसे ईरान में हुए हवाई हमलों और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों सहित बढ़ते तनाव के बारे में जानकारी दी गई।
सीसीएस ने पश्चिम एशिया से होकर गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और निर्धारित परीक्षाओं में शामिल हो रहे छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों की भी समीक्षा की।
ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उत्पन्न हुई स्थिति का जायजा लेने के लिए सीसीएस की बैठक बुलाई गई थी। ईरान ने इस हमले का जवाब देते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थित इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ दुबई पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैठक में उपस्थित थे। सीसीएस की बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद थे। |