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मुजफ्फरपुर में संस्कार की अनोखी मिसाल, 152 बरुआ ने धारण किया जनेऊ

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मुजफ्फरपुर में सामाजिक‑धार्मिक परंपरा का एक अनोखा नजारा देखने को मिला। जागरण  



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । बिहार के मुजफ्फरपुर में सामाजिक‑धार्मिक परंपरा का एक बेहद रोचक और अनोखा नजारा देखने को मिला है, जहां 152 बरुआ (यानी उपनयन संस्कार से पहले की अवस्था के युवा) ने एक साथ जनेऊ (यज्ञोपवीत) धारण कर पूरी उपनयन/संस्कार की परंपरा को जीवंत रूप से अपनाया। यह आयोजन इस बात का प्रतीक भी है कि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने के लिए कितनी उत्सुक है।

उपनयन संस्कार हिंदू धर्म में एक प्राचीन संस्कार माना जाता है, जिसमें बच्चे को जनेऊ धारण कराया जाता है। यह जीवन के आध्यात्मिक और सामाजिक उत्तरदायित्वों को स्वीकारने का एक प्रतीकात्मक चरण है।

मिथिला जैसी पारंपरिक संस्कृतियों में इसे “जनेऊ संस्कार” के नाम से जाना जाता है, जहां यह युवा को समाज में द्विज अर्थात “दूसरी बार जन्म” के प्रतीक रूप में सम्मानित करता है।

152 बरुआओं का एक साथ इस संस्कार में सम्मिलित होना यह दर्शाता है कि परंपराएं अब भी लोगों के जीवन में प्रासंगिक हैं, और सामूहिक रूप से इन्हें निभाने की भावनाएं भी मजबूत हैं। जिससे समुदाय में सांस्कृतिक एकता और पारंपरिक ज्ञान दोनों का उत्साहजनक प्रदर्शन होता है।

  
दिल्ली व मुंबई से आकर बच्चों का कराया उपनयन संस्कार

संस्कार महोत्सव में 152 बरुआ को जनेऊ धारण कराया गया। धर्म समाज संस्कृत महाविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों से बरुआ शामिल हुए। 51 आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान से उपनयन संस्कार कराया।

दिल्ली में सपरिवार रहने वाले सीतामढ़ी के सुबोध झा ने बताया कि दूर रहने के कारण समय पर बच्चे का जनेऊ संस्कार नहीं हो पा रहा था।

यहां आकर उपनयन कराने से समय और संसाधन दोनों की बचत हुई। वहीं मुंबई में रहने वाले समस्तीपुर के अवध चौधरी ने कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से उपनयन कराने की सोच रहे थे, लेकिन इस बार अवसर मिला और एक सप्ताह में पूरा संस्कार संपन्न हो गया।

चाणक्य विद्यापति सोसायटी के अध्यक्ष पंडित विनय पाठक और आयोजन संयोजक शंभुनाथ चौबे ने बताया कि पिछले 14 वर्षों से यह आयोजन समाज के सहयोग से किया जा रहा है। सनातन समाज के जो भी लोग अपने बच्चों का उपनयन संस्कार कराना चाहते थे।

सभी सपरिवार शामिल हुए। आचार्य पंडित नवीन झा, पंडित चंद्रमणि पाठक, पंडित गौतम पांडेय, प्रो. निगम पांडेय, प्रो. शशिरंजन पांडेय, प्रो. दीनानाथ झा, हरिशंकर पाठक और आशुतोष मिश्रा सहित अन्य आचार्यों ने संस्कार की विधियां करायी।

यहां धर्म समाज संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अश्विनी कुमार शर्मा, विधायक रंजन कुमार, मेयर निर्मला देवी, पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा, पूर्व सांसद अजय निषाद, रेडक्रास सोसायटी के सचिव उदयशंकर प्रसाद सिंह, पूर्व विधायक केदार प्रसाद, छात्र हम के प्रदेश अध्यक्ष संकेत मिश्रा,

आटो एसोसिएशन के अध्यक्ष इलियास इल्लू, महासचिव एआर अन्नू, भाजपा नेता नेता कौशल दूबे और केशव चौबे, राकेश पांडे, ओम प्रकाश शर्मा, सहदेव राम, चंदन पाण्डेय सहित कई लोग उपस्थित थे।

आयोजन में सोसायटी के संरक्षक साकेत रमन पांडे, शंभूनाथ मिश्रा, इंद्रकांत झा, भुवनेश्वर झा, प्रवीण कुमार झा, पंडित मनोज ठाकुर, पंडित सतेंद्र ठाकुर, पप्पू झा, स्नेहवत्स झा, रंजना झा और कल्पना मिश्रा ने सहयोग किया। महिला शाखा अध्यक्ष रंजना झा के नेतृत्व में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।   
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