गाजियाबाद आरटीओ कार्यालय।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। जिले में 17 फरवरी से लागू नए नियम के तहत वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) में दर्ज मोबाइल नंबर पर ओटीपी आना अनिवार्य कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद प्रदूषण जांच (पीयूसी) की रफ्तार जरूर धीमी हुई है, लेकिन वाहन चालकों के लिए राहत की बात यह है कि वे अपना मोबाइल नंबर आसानी से ऑनलाइन अपडेट करा सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, यदि आरसी और आधार कार्ड की जानकारी करीब 70 प्रतिशत तक मेल खाती है तो वाहन स्वामी को आरटीओ कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। वह आनलाइन पोर्टल पर आरसी और आधार की जानकारी दर्ज कर मोबाइल नंबर का संशोधन कर सकता है। अगर इसके बाद भी समस्या आती है, तो आरटीओ कार्यालय में आवेदन कर कुछ ही समय में नंबर अपडेट कराया जा सकता है।
रोजाना आरटीओ कार्यालय पहुंच रहे 15 से 20 वाहन स्वामी
जिले में करीब 250 प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हैं। नए नियम लागू होने के बाद पीयूसी जांच कराने वाले वाहनों की संख्या में कमी आई है। इससे पहले तक सभी केंद्रों पर रोजाना तीन हजार से अधिक वाहनों की जांच होती थी। अब मोबाइल नंबर अपडेट न होने के कारण रोजाना 15 से 20 वाहन स्वामी आरटीओ कार्यालय पहुंच रहे हैं।
दरअसल, 16 फरवरी से पहले प्रदूषण जांच के दौरान वाहन स्वामी के मोबाइल पर ओटीपी की कोई आवश्यकता नहीं होती थी, लेकिन अब ओटीपी सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। ओटीपी आरसी में दर्ज मोबाइल नंबर पर ही भेजा जाता है। ऐसे में जिन वाहन स्वामियों का नंबर अपडेट नहीं है या जिनके पास संबंधित मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं है, उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
चालान की भी बढ़ी समस्या
आरसी में दर्ज मोबाइल नंबर अपडेट न होने से ओटीपी नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण पीयूसी प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। बिना वैध पीयूसी के वाहन सड़क पर चलने पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान किया जा रहा है। ऐसे में कई वाहन स्वामियों को पीयूसी न बनने और चालान दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन स्वामियों को 10 हजार तक के जुर्माना का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 20 से 25 जनवरी तक जारी हुई पीयूसी का विवरण
तारीख कुल पीयूसी
20 फरवरी
1533
21 फरवरी
1613
22 फरवरी
1453
23 फरवरी
1263
24 फरवरी
1694
25 फरवरी
1410
मोबाइल नंबर पर ओटीपी अनिवार्यता से पीयूसी व्यवस्था पारदर्शी और सुरक्षित होगी। जिन वाहनों के नंबर अपडेट नहीं है, वे आनलाइन पोर्टल से आसानी से संशोधन करा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आरटीओ कार्यालय में भी त्वरित समाधान उपलब्ध है।
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- अशोक कुमार श्रीवास्तव, एआरटीओ प्रशासन  |