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मुंबई में 57% कैंसर मरीजों के लिए प्रदूषण जिम्मेदार, महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में किया खुलासा

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मुंबई में 57% कैंसर मरीजों के लिए प्रदूषण जिम्मेदार (प्रतिकात्मक फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के महानगरों की हवा अब केवल सांस लेने में तकलीफ ही नहीं, बल्कि जानलेवा कैंसर का कारण बन रही है। यह हम नहीं कह रहें, बल्कि खुद महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि मुंबई में प्रदूषण से कैंसर हो रहा है।

दरअसल, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण और फेफड़ों के कैंसर के बीच सीधा संबंध है।

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए कैंसर स्क्रीनिंग अभियान में राज्य में 1,677 मरीजों का पता चला। जांच के दौरान इन मरीजों में यह पाया गया कि वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर के मामलों में अहम भूमिका निभा रहा है। फेफड़ों का कैंसर कुल कैंसर मामलों का लगभग 57% है। हालांकि मुंह, सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के मरीज भी मिले हैं।
दिल्ली में भी बढ़ रहें मामले

यही नहीं देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़े तेजी से बढ़ते मामलों की गवाही दे रहे हैं। हालांकि, इसको लेकर केंद्र सरकार का रुख इससे अलग है। सरकार ने संसद में स्पष्ट कहा है कि देश में ऐसा कोई निर्णायक राष्ट्रीय आंकड़ा नहीं है, जिससे वायु प्रदूषण से किसी बीमारी या मौत का सीधा संबंध मिले।
हवा में मौजूद कण ही कार्सिनोजेन

ज्ञात हो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर एजेंसी आईएआरसी ने बाहरी वायु प्रदूषण को ग्रुप-1 कार्सिनोजेन यानी कैंसर पैदा करने वाला सबसे मुख्य कारक घोषित किया हुआ है। मेडिकल जर्नल लैंसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम 2.5 के बारीक कण फेफड़ों की गहराई तक जाकर कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे ट्यूमर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

रिसर्च में यह भी पता चला है कि जो लोग कभी धूम्रपान नहीं करते, उनमें फेफड़ों के कैंसर का एक बड़ा कारण दूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म जहरीले कण ही पाए गए हैं। जो कैंसर के प्रति प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं।
दशक भर से प्रदूषण झेल रही मुंबई

मुंबई में पिछले 10 वर्षों से PM 2.5 और PM 10 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से लगातार ऊपर बना हुआ है। हवा की गुणवत्ता लगातार खराब श्रेणी में है। पीएम 2.5 स्तर भी डब्ल्यूएचओ के मानक से लगभग सात गुना अधिक है।
दिल्ली में कैंसर के मामलों में उछाल

दिल्ली में राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में 13.6% की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। वहीं, पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर के मामले 8.8% बढ़े हैं। दिल्ली में पीएम 2.5 स्तर भी डब्ल्यूएचओ के मानक से 20 गुना तक अधिक बना हुआ है। जिससे सांस और हृदय रोगों का खतरा बढ़ गया है।

यह भी पढ़ें- मुंबई में प्रदूषण से फेफड़ों के कैंसर के मामलों में भारी उछाल, सरकार ने विधानसभा में दी चेतावनी   
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