पशुपालन विभाग का गोदाम। जागरण
ब्रजेश पांडेय, बस्ती। पशु चिकित्सालय के वृहद गोदाम से चोरी गए 115 कंटेनर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के गले की फांस बन गए हैं। पशुओं के गर्भाधान में प्रयोग आने वाले यह कंटेनर वर्ष 2020-21 में मंगाए गए थे, लेकिन विभागीय उदासीनता से वह गोदाम में पांच वर्ष तक पड़े रह गए। बाद में चोरी हो गए तो सवाल भी उठने लगे हैं।
इस प्रकरण में शासन के निर्देश पर एक जांच टीम भी गठित हुई है, ज्वाइंट डायरेक्टर डा. राजेश तिवारी के नेतृत्व में बनी यह कमेटी शासन को अपनी रिपोर्ट से अवगत कराएगी। इसके बाद संबंधित जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पर कार्यवाही भी हो सकती है।
पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र स्थित दक्षिण दरवाजा पुलिस चौकी क्षेत्र में स्थापित एडी कार्यालय एवं कर्मचारियों के आवास के पास बने गोदाम से 10 या 11 सितंबर की रात चोरी हो गई। विभाग इस मामले को एक सप्ताह तक दबाए रखा।
चोरी होने वाले सामानों में एल्यूमीनियम व पीतल के कंटेनर थे, जिसमें अधिकांश आधे लीटर से पांच लीटर तक थे। दो फ्रीज एवं एक आइस बाक्स भी चोरी हुए थे। पुलिस अभी तक इस घटना का पर्दाफाश नहीं कर पाई है।जांच में यह मामला सामने आया है कि गोदाम डिप्टी सीवीओ डा. सीमा भारती के प्रभार में था, जबकि स्टोर इंचार्ज की जिम्मेदारी वेटनरी फार्मासिस्ट विनय प्रताप सिंह संभाल रहे थे।
डा. सीमा भारती ने चोरी की आनलाइन एफआइआर दर्ज कराई थी। घटना के संज्ञान में आने पर शासन के निर्देश के क्रम में बस्ती मंडल के अपर निदेशक ग्रेड टू डा. जीवन लाल ने जांच कमेटी गठित की।
यह भी पढ़ें- 25 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार हुआ लेखपाल, एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से मची खलबली
ज्वाइंट डायरेक्ट डा. राजेश तिवारी, संतकबीर नगर के मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके तिवारी और सिद्धार्थनगर के सीवीओ डा. गणेश प्रसाद संयुक्त रूप से इसकी जांच कर रहे हैं। जांच टीम ने चोरी गए सामानों के आकलन के लिए शासन से अनुमति मांगी थी, जिस पर आकलन की रिपोर्ट शासन में जानी है।
शासन ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से पूछे सवाल
प्रदेश पशुधन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. प्रमोद कुमार सिंह ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से पूछा है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में कृत्रिम गर्भाधान योजना में बीए 0.5 लीटर के कंटेनर उपलब्ध कराए गए थे, जिसे पशु मित्रों में वितरित किया जाना था, परंतु पांच वर्ष तक यह कंटेनर क्यों संरक्षित थे।
उस समय कंटेनर क्यों नहीं वितरित किए गए। वितरित न किये जाने वाले संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर क्या कार्यवाही की गयी। एफआइआर की रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। राजकीय पशु चिकित्सालय पर चोरी के समय कोई चौकीदार उपलब्ध था अथवा नहीं। चोरी के संबंध में उत्तरदायित्व निर्धारित किया गया अथवा नहीं।
प्रकरण की जांच के लिए ज्वाइंट डायरेक्टर की अध्यक्षता में जांच चल रही है। कई तरह के कंटेनर चोरी हुए थे। अभी फाइनल रिपोर्ट नहीं मिली है। शासन स्तर से जो सवाल पूछे गए हैं, उसके बारे में रिपोर्ट भेज दी जाएगी। -
-डा. अरुण कुमार गुप्ता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बस्ती  |