पटाखा फैक्ट्री में आग लगने के बाद बुझाते दमकल कर्मी। फोटो: आर्काइव
जागरण संवाददाता, भिवाड़ी/रेवाड़ी। खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के 11 दिन बाद एक और श्रमिक ने दम तोड़ दिया। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचाराधीन नाबालिग श्रमिक जुन्नू की बुधवार रात मौत हो गई। वह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के हरिसिद्धि अंचल के मुरारपुर गांव का रहने वाला था। इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है।
अवैध संचालन और बंद गेट के पीछे खतरनाक काम
16 फरवरी को गारमेंट जोन स्थित प्लॉट में अवैध रूप से पटाखे बनाने का काम चल रहा था। प्लॉट कपड़ा फैक्ट्री के लिए आवंटित था, लेकिन अंदर से गेट बंद कर पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। हादसे के दिन 20 से अधिक श्रमिक अंदर काम कर रहे थे, तभी एक के बाद एक तीन धमाके हुए और भीषण आग भड़क उठी।
कुछ श्रमिक जान बचाकर भाग निकले, लेकिन 11 लोग अंदर फंस गए। सात की मौके पर ही मौत हो गई थी। गंभीर रूप से झुलसे अनूप की पांच दिन पहले मौत हुई और अब जुन्नू ने भी दम तोड़ दिया।
किराये के भूखंडों पर फलता-फूलता अवैध नेटवर्क
प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ है कि औद्योगिक क्षेत्र में कई अवैध इकाइयां बाहरी लोगों के नाम पर लिए गए भूखंडों को किराये पर लेकर चलाई जा रही थीं।
स्थानीय लोगों के बजाय बाहरी जमीन मालिकों के प्लॉट इस्तेमाल किए जाते थे, ताकि गतिविधियां गुप्त रह सकें और किसी को भनक न लगे। डीएसटी की जांच में ऐसे कई नाम सामने आने की संभावना है, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस अवैध नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
जिम्मेदारी और कार्रवाई के सवाल
पुलिस ने फैक्ट्री के मुख्य संचालक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, नौ मौतों के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि औद्योगिक क्षेत्र में अवैध और खतरनाक गतिविधियां आखिर प्रशासन की नजर से कैसे बचती रहीं।
यह हादसा सिर्फ एक फैक्ट्री विस्फोट नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध कारोबार के जाल की गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है।
यह भी पढ़ें- हरियाणा के भिवानी में खौफनाक हादसा, पत्नी को बस स्टैंड छोड़ने आए पूर्व सैनिक को कार ने मारी टक्कर; हालत गंभीर  |