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आखिर रविवार को ही क्यों मिलता है वीकऑफ? इसके पीछे छिपी है एक दिलचस्प कहानी

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रविवार को ही क्यों होती है छुट्टी? (AI Generated Image)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रविवार का नाम सुनते ही चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान आ जाती है। यह दिन परिवार के साथ समय बिताने और काम से ब्रेक का होता है। भारत में रविवार साप्ताहिक छुट्टी होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं हमेशा से ऐसा नहीं था।  

रविवार को साप्ताहिक छुट्टी चुनने के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है, जो मजदूरों के अधिकार और ब्रिटिश शासन से जुड़ी है। आइए जानें क्यों रविवार को ही साप्ताहिक छुट्टी के दिन के रूप में चुना गया।  
बिना ब्रेक के करना पड़ता था काम

आज हम जिस वीकेंड का आनंद लेते हैं, वह हमेशा से ऐसी नहीं थी। ब्रिटिश शासन के दौरान, भारत में खासकर मुंबई की कपड़ा मिलों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति बहुत दयनीय थी। उन्हें सप्ताह के सातों दिन बिना किसी ब्रेक के काम करना पड़ता था। लंबे समय तक लगातार काम करने के कारण उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था। इसी मुश्किल समय में उनके नायक बने नारायण मेघाजी लोखंडे।

  

(Picture Courtesy: Freepik)
सात साल का लंबा संघर्ष

मजदूरों के दुख को देखते हुए लोखंडे ने उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाई। साल 1881 से 1884 के बीच उन्होंने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए और ब्रिटिश प्रशासन को कई संदेश भेजे। उनकी अपील पर हजारों की संख्या में मजदूर एक साथ आए, लेकिन यह कोई छोटी लड़ाई नहीं थी। यह आंदोलन पूरे सात साल तक चला। अंत में मजदूरों की एकजुटता और लोखंडे की कोशिशों के आगे ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और 10 जून 1890 को भारत में रविवार को आधिकारिक रूप से साप्ताहिक छुट्टी घोषित कर दिया गया।
रविवार का दिन ही क्यों चुना गया?

रविवार को ही छुट्टी के लिए चुने जाने के पीछे धार्मिक और व्यावहारिक, दोनों कारण थे-

  • उस समय भारत में ब्रिटिश हुकुमत थी, जो ईसाई धर्म को मानते थे। उनके लिए रविवार चर्च जाने का दिन था। इसलिए रविवार को छुट्टी के दिन के लिए चुना गया।
  • एक तर्क भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म से जोड़कर भी दिया गया कि रविवार का दिन सूर्य देव और कुछ क्षेत्रों में भगवान खंडोबा को समर्पित है। अंग्रेजों की तरह ही भारतीय मजदूरों को भी आराम और पूजा के लिए एक दिन मिलना चाहिए।

1700 साल पुराना इतिहास

दिलचस्प बात यह है कि रविवार को आराम का दिन बनाने की शुरुआत भारत से नहीं हुई थी। इसका इतिहास बहुत पुराना है। साल 321 ईस्वी में रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन द ग्रेट ने सबसे पहले पूरे रोमन साम्राज्य में रविवार को आराम का दिन घोषित किया था। धीरे-धीरे यह परंपरा यूरोप और फिर ब्रिटेन के प्रशासनिक तंत्र का हिस्सा बन गई, जिसे वे भारत लेकर आए।

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