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यूपी में विद्युत दरों पर मंथन शुरू, नियामक आयोग की सुनवाई में पहले दिन 24 घंटे बिजली की उठी मांग

Chikheang 3 hour(s) ago views 485
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। अगले वित्तीय वर्ष के लिए बिजली की दरों को तय करने के मद्देनजर विद्युत नियामक आयोग ने बुधवार से बिजली कंपनियों के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) पर सुनवाई शुरू कर दी। पहले दिन उत्तर प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (यूपीएसएलडीसी) की सुनवाई हुई।

आयोग 27 फरवरी को अयोध्या में पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन(विद्युत पारेषण निगम) की सुनवाई करेगा। विद्युत वितरण कंपनियों के एआरआर पर आयोग मार्च में विभिन्न शहरों में जाकर सुनवाई करेगा।

आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार तथा सदस्य संजय कुमार सिंह द्वारा बुधवार को यूपीएसएलडीसी की सुनवाई में उपभोक्ताओं की ओर से दर्जनों विद्युत उत्पादन इकाइयों को बंद करके कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली नहीं देने का मुद्दा उठाया गया।

उपभोक्ता संगठनों ने कहा कि उत्पादन इकाइयों को बिजली का कम मांग (लो डिमांड) दिखाते हुए बंद किया गया है। आज भी बिजली आपूर्ति का रोस्टर लागू है जिसे समाप्त कर सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली दी जाए।

यूपीएसएलडीसी का एआरआर वर्ष 2026-27 के लिए 51.50 करोड़ रुपये दिखाया गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने सुनवाई के दौरान यूपीएसएलडीसी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक मिनट पहले याचिका अपलोड कर सुनवाई की जानकारी दी जा रही है। आयोग से मांग की कि इस नियम विरुद्ध कार्रवाई के मामले में हस्तक्षेप करे।

आयोग ने पहले कहा था यूपीएसएलडीसी को स्वतंत्र करके उसका प्रबंध निदेशक अलग किया जाए लेकिन आज भी यूपीएसएलडीसी और पावर ट्रांसमिशन के प्रबंध निदेशक का प्रभार एक ही अधिकारी के पास है।

सभी कंपनियों के अध्यक्ष भी एक हैं। आयोग के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। ट्रांसमिशन व यूपीएसएलडीसी के प्रबंध निदेशक मयूर माहेश्वरी के साथ ही दोनों कंपनियों के निदेशक सुनवाई में उपस्थित रहे।

  
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