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राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड विधानसभा में बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए झामुमो विधायक अनंत प्रताप देव ने इसे प्रतिकूल परिस्थिति में राज्य के विकास का बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई आंकड़ों का पुलिंदा नहीं बल्कि झारखंड के संकल्प की आधारशिला है। गांव, गरीब, किसानों का बजट है। इसी के साथ जोड़ा कि 2019 में निर्बाध बिजली शुरू हुई और यह अभी भी जारी है। लोगों को 22-24 घंटे बिजली मिल रही है।
इसके बाद सरकार पर हमला करते हुए भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा कि राज्य का वित्तीय प्रबंधन जिस तरह ढिंढोरा पीटा जाता है उस तरह नहीं है। 2024-25 के बजट से 2025-26 में कुल 13 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी और इस बार मात्र 9.2 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। बजट में वित्तीय प्रबंधन की कमी दिखाई देती है।
यह बजट भी परंपरागत बजट रहा है और सिर्फ इसका नाम बदला है। निराशाजनक बजट है और पुरानी योजनाओं को नये रूप में लाया गया है। उन्होंने कहा कि धनबाद में पेयजल योजना की शुरुआत 2018 में की गई और 2022 में पूरा होना था, लेकिन 2026 में भी अभी तक पूरा नहीं हो सका।
प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जरूरी : डॉ. रामेश्वर उरांव
कांग्रेस विधायक और पूर्व वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि बजट से गांव समृद्ध होंगे, महिलाएं सशक्त होंगी, स्वास्थ्य योजना को प्रोत्साहन मिलेगा। पूंजीगत व्यय को बढ़ावा अच्छी बात है। सामाजिक क्षेत्र के लिए यह अच्छा है। उन्होंने इसके साथ ही जोड़ा कि झारखंड में प्रकृति ने हमें भरपूर संसाधन दिया है। इसका उपयोग नहीं हो रहा है। आर्थिक विषमता भी है, जिसे दूर करना होगा। राजद के सुरेश पासवान और माले के चंद्रदेव महतो ने भी बजट पर अपनी बात रखी।
आवंटित राशि खर्च होती है या नहीं : सरयू राय
जदयू विधायक सरयू राय पिछले वर्षों में दस हजार करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिलने के मामले का उठाया। कहा कि बजट के आंकड़ों के अनुसार राज्य प्रगति कर रहा है। अब देखना है कि जिस मद में राशि आवंटित की गई है उसमें वह खर्च हो पाता है या नहीं। सरकार मंइयां समेत तमाम योजनाओं की ग्रास रूट पर सर्वे करा ले, ताकि दी जा रही राशि का सदुपयोग हो सके।
अबुआ नहीं बबुआ बजट : निर्मल महतो
आजसू विधायक निर्मल महतो ने कहा कि अबुआ बजट सिर्फ बबुआ बजट बन कर रह गया है। भाजपा और कांग्रेस-झामुमो एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं, लेकिन जनता का काम नहीं हो रहा है। उनके विधानसभा में डीएमएफटी फंड छोड़कर सरकार ने एक भी सड़क नहीं दी है।
झारखंड को मैन्यूफैक्चरिंग पावर हाउस बनाने की जरूरत : जयराम
चर्चा में भाग लेते हुए जेकेएलएम के विधायक जयराम महतो ने कहा कि बजट केवल खर्च का दस्तावेज नहीं आर्थिक विजन का आइना होना चाहिए। प्रति व्यक्ति आय, फूड प्रोसेसिंग, मिलेट मिशन आदि के बारे में सरकार को जानकारी देनी चाहिए। झारखंड से लोहा-कोयला-बाक्साइड आदि खनिज बाहर भेजे जाते हैं और वहां इनके माध्यम से दूसरे राज्यों की कमाई होती है। उससे बना समान महंगे दाम में यहां बेचा जता है। झारखंड को महज आपूर्तिकर्ता नहीं बल्कि निर्माता राज्य बनना चाहिए।
विधायकों ने पूछा सिलेंडर सस्ती क्यों नहीं हुई, राधाकृष्ण बोले 38 हजार सरकारी नौकरियां दीं
चर्चा के दौरान सरकार के वादों पर भी विपक्ष के विधायकों ने सवाल उठाए। पूछा कि सिलेंडर की कीमत 500 रुपये करने का वादा क्या हुआ? दूसरी ओर, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि 38 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। इस बजट में पहली बार स्थापना मद की राशि में बढ़ोतरी हुई है। मछली उत्पादन में झारखंड आत्मनिर्भर हुआ है तो दुग्ध उत्पादन में भी आंकड़ों में सुधार है।  |
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