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ट्रंप का दूसरा कार्यकाल: सुप्रीम कोर्ट का झटका, अर्थव्यवस्था में मिला-जुला असर... कैसा रहा अब तक का समय?

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सुप्रीम कोर्ट का झटका अर्थव्यवस्था में मिला-जुला असर कैसा रहा US प्रेसिडेंट का अब तक का समय (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को एक साल से ज्यादा हो चुका है। इस दौरान उनकी आर्थिक नीतियों का असर मिला-जुला रहा है। एक तरफ अर्थव्यवस्था में अच्छी वृद्धि और टेक्नोलॉजी सेक्टर, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश बढ़ा है, तो दूसरी तरफ रोजगार की रफ्तार धीमी पड़ी है और महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

पिछले हफ्ते संयुक्त राज्य अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को रद कर दिया, जो उनकी आर्थिक नीति का अहम हिस्सा थे। इस फैसले के बाद अमेरिका की आर्थिक दिशा को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। ट्रंप की नीतियों में टैक्स कटौती, टैरिफ, सख्त इमिग्रेशन नियम और नियमों में ढील शामिल रही है। ये सब उनकी \“अमेरिका फर्स्ट\“ नीति से जुड़े रहे हैं।
जीडीपी वृद्धि और निवेश की स्थिति

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की शुरुआत पिछले साल गिरावट के साथ हुई थी, क्योंकि कंपनियों ने संभावित टैरिफ से पहले ज्यादा आयात कर लिया था। साल के आखिर में रिकॉर्ड लंबी सरकारी शटडाउन की वजह से भी वृद्धि धीमी पड़ी।

हालांकि बीच के महीनों में जीडीपी वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही। ट्रंप के \“वन बिग ब्यूटीफुल बिल\“ के तहत दी गई टैक्स कटौती से इस साल भी वृद्धि को सहारा मिलने की उम्मीद है। एआई में भारी निवेश और मजबूत उपभोक्ता खर्च आर्थिक विस्तार के बड़े कारण बने हैं।
टैरिफ, व्यापार घाटा और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

टैरिफ ट्रंप की आर्थिक रणनीति का मुख्य हिस्सा रहे हैं। राष्ट्रपति पद संभालने से पहले ही कंपनियों ने संभावित शुल्क से बचने के लिए आयात बढ़ा दिया था, जिससे व्यापार घाटा अस्थायी रूप से बढ़ गया। विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय में टैरिफ से आयात-निर्यात का अंतर कम हो सकता है, लेकिन अब तक ऐसा साफ तौर पर नहीं दिखा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से \“इमरजेंसी\“ वैश्विक टैरिफ रद हो गए हैं। हालांकि सरकार ने इसकी भरपाई के लिए 15 प्रतिशत नए टैरिफ लगा दिए हैं और दूसरे कानूनी विकल्पों से आयात शुल्क से राजस्व बनाए रखने की बात कही है।
रोजगार घटा

अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन बढ़ा है। एआई निवेश और टैक्स कटौती से इसे सहारा मिला है, भले ही आयात शुल्क और ऊंची ब्याज दरों का दबाव रहा हो। विश्लेषकों को उम्मीद है कि इस साल उत्पादन में सुधार और फैल सकता है।

लेकिन उत्पादन बढ़ने के बावजूद फैक्ट्री नौकरियों में गिरावट आई है। ट्रंप का एक बड़ा लक्ष्य मैन्युफैक्चरिंग रोजगार बढ़ाना था, लेकिन अब तक यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया है।
रोजगार बाजार और महंगाई की स्थिति

जनवरी तक बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत रही, जो हल्की बढ़त के बावजूद अभी भी अपेक्षाकृत कम है। पिछले साल कुल 1.8 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जो 2024 में औसतन हर महीने जुड़ने वाली 1.68 लाख नौकरियों से थोड़ा ही ज्यादा है।

जनवरी में 1.3 लाख नौकरियां जुड़ीं, लेकिन यह रफ्तार आगे जारी रहेगी या नहीं, यह साफ नहीं है। विश्लेषकों के मुताबिक, सख्त इमिग्रेशन नीति की वजह से श्रम आपूर्ति और नौकरी की मांग दोनों प्रभावित हुई हैं।
महंगाई और घरों की पहुंच अब भी चिंता

पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में महामारी के बाद महंगाई काफी बढ़ी थी। अब महंगाई कुछ कम हुई है, लेकिन साल के आखिर में कीमतों में फिर बढ़त का रुझान दिखा।

ट्रंप ने पूर्व फेड गवर्नर केविन वॉर्श को मई में जेरोम पॉवेल की जगह फेड चेयर बनाने के लिए नामित किया है। बाजार को उम्मीद है कि तब तक महंगाई कम होगी और जून से ब्याज दरों में कटौती शुरू हो सकती है, खासकर अगर नौकरी बाजार और कमजोर हुआ। इसके बावजूद आम अमेरिकी परिवारों के लिए घर खरीदना अभी भी मुश्किल है। मॉर्गेज दरें ऊंची हैं और मकानों की कमी बनी हुई है।

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