राज्य ब्यूरो, लखनऊ। पिछड़ा वर्ग के पूर्वदशम विद्यार्थियों को अगले वित्तीय वर्ष में तीन हजार रुपये तक छात्रवृत्ति मिलेगी। सरकार छात्रवृत्ति में 750 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है।
मंगलवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी।
बताया कि अब तक पूर्वदशम कक्षाओं के लिए अधिकतम 2250 रुपये तक छात्रवृत्ति दी जाती थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा को दो लाख से बढ़ाकर ढाई लाख करने से लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 38 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिलने की संभावना है।
अपने सरकारी आवास पर पत्रकार वार्ता में मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के लिए 3402 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग नौ प्रतिशत अधिक है।
वहीं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का बजट बढ़ाकर 2140 करोड़ रुपये किया गया है। दिव्यांग छात्राओं को ई-ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने के लिए नई योजना शुरू की गई है, इसके लिए 60 करोड़ रुपये रखे गए हैं। कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण एवं मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरण योजनाएं भी संचालित रहेंगी।
मंत्री ने दावा किया कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत वर्ष 2023-24 से एक भी पात्र विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित नहीं रहा है।
पहले छात्रवृत्ति वितरण 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन होता था, लेकिन योगी सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 25 सितंबर से ही छात्रवृत्ति वितरण प्रारंभ कर दिया। अब तक 20 लाख छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि पिछड़ा वर्ग विभाग की शादी अनुदान योजना में वर्ष 2026-27 में 210 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके लिए आय सीमा को वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही बढ़ाकर एक लाख रुपये वार्षिक किया जा चुका है।
प्रदेश में संचालित 102 पिछड़ा वर्ग छात्रावासों के रखरखाव के लिए पांच करोड़ रुपये रखे गए हैं। मुख्यमंत्री कीं पेंशन राशि बढ़ाने की घोषणा के बाद दिव्यांगजन पेंशन राशि एक हजार रुपये रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये होने जा रही है। वर्ष 2017 से पहले 300 रुपये पेंशन थी।
पेंशन मद में 1400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सभी मंडलों में दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के लिए सात करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है।
इन केंद्रों के माध्यम से दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान से उपचार तक की व्यवस्था सुदृढ़ होगी। वहीं चित्रकूट स्थित 500 करोड़ रुपये की लागत वाला दिव्यांग विश्वविद्यालय अब राज्य सरकार के अधीन आ चुका है।  |
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