फाइल फोटो।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड उच्च न्यायालय ने जमशेदपुर के बागबेड़ा थाना अंतर्गत नागाडीह में हुए सनसनीखेज हत्याकांड के सजायाफ्ता राजाराम हांसदा की अपील याचिका को खारिज कर दिया है। राजाराम हांसदा को जमशेदपुर न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे उसने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। गौरतलब है कि राजाराम घटना के दो दिन बाद से ही न्यायिक हिरासत में है।
चार दोषियों को पहले ही मिल चुकी है जमानत
इसी मामले में अन्य चार दोषियों रेंगो पूर्ति, गोपाल हांसदा, सुनील सरदार और तारा मंडल के लिए स्थिति थोड़ी अलग रही। न्यायालय ने बीते 5 फरवरी को इनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली थी, जिसके बाद वे जेल से रिहा हो चुके हैं। हालांकि, राजाराम हांसदा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
निचली अदालत में सुनवाई जारी, पुलिस अधिकारी की गवाही नागाडीह हत्याकांड से जुड़े दो अन्य मामले अभी भी जमशेदपुर जिला न्यायालय में लंबित हैं। मंगलवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश कनकन पट्टेदार की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान पुलिस अधिकारी पारस सिंह की गवाही दर्ज की गई। गवाह ने अदालत में एक अन्य आरोपित जगता मार्डी की स्पष्ट पहचान की और घटना में उसकी सक्रिय संलिप्तता की जानकारी साझा की।
क्या था नागाडीह हत्याकांड?
यह मामला 18 मई 2017 का है, जब पूरा कोल्हान बच्चा चोरी की अफवाहों की चपेट में था।
- भीड़ का तांडव: 18 मई की शाम बागबेड़ा के नागाडीह में ग्रामीणों की अनियंत्रित भीड़ ने लाठी, डंडे और पत्थरों से हमला कर दिया था।
- चार मौतें: पुलिस की मौजूदगी में हुई इस हिंसक घटना में जुगसलाई नया बाजार निवासी विकास वर्मा, गौतम वर्मा और गंगेश की मौके पर ही मौत हो गई थी।
- वृद्धा की मौत: हमले में घायल वृद्ध महिला रामसखी देवी की इलाज के दौरान 20 जून 2017 को टीएमएच में मौत हुई थी।
सजा का संक्षिप्त इतिहास
लंबी सुनवाई के बाद जमशेदपुर न्यायालय ने 8 अक्टूबर 2025 को राजाराम हांसदा सहित पांच लोगों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी आदेश के खिलाफ दोषियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले में कई अन्य आरोपित साक्ष्य के अभाव में पूर्व में ही बरी हो चुके हैं।  |