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धार किले में सुरक्षित रखीं भगवान कुबेर व अर्धनारीश्वर की प्राचीन प्रतिमाएं, तीसरी तस्वीर में धार भोजशाला।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश में धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट सरस्वती (वाग्देवी) मंदिर बनाम कमाल मौलाना दरगाह-मस्जिद विवाद की कानूनी लड़ाई में हिंदू पक्ष को उसके दावे के समर्थन में नया आधार देती है।
सर्वे रिपोर्ट में ये साक्ष्य शामिल
98 दिन तक किए गए वैज्ञानिक सर्वे की कोर्ट में प्रस्तुत 2189 पृष्ठ की रिपोर्ट में मांडू के छप्पन महल संग्रहालय में रखी नायिका और धार के जिला संग्रहालय में सुरक्षित अर्धनारीश्वर के साथ ही धार किला में संग्रहित 11 वीं शताब्दी की भगवान कुबेर की मूर्तियों को भी भोजशाला में मंदिर होने के साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है। ये तीनों मूर्तियां पूर्व में भोजशाला परिसर की खोदाई के दौरान मिली थीं।
हिंदू पक्ष का दावा मजबूत
रिपोर्ट में उल्लेख है कि सर्वे के दौरान जो मूर्तियां, स्थापत्य खंड, शिलालेख और अन्य अवशेष प्राप्त हुए, उनके अतिरिक्त परिसर के अलग-अलग हिस्सों में पहले से सुरक्षित सामग्री कानूनी विवाद में हिंदू पक्ष के दावे को मजबूत करती है। इन साक्ष्यों पर हाई कोर्ट में आगामी सुनवाई में चर्चा किए जाने की संभावना है। सर्वे रिपोर्ट के यह भी दावा किया गया है कि देश की स्वतंत्रता से पहले भोजशाला परिसर से कुछ महत्वपूर्ण अवशेष ब्रिटिश अधिकारी बाहर ले जाए गए थे।
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कोर्ट के निर्देश पर हुआ था सर्वे
बता दें कि एएसआई ने भोजशाला परिसर का सर्वे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर वर्ष 2024 में 22 मार्च से 27 जून यानी 98 दिनों तक करने के बाद जुलाई 2024 में उसकी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने गत 22 जनवरी को हाई कोर्ट को सुनवाई करके भोजशाला के वास्तविक धार्मिक स्वरूप पर निर्णय करने का आदेश दिया है। इसी कड़ी में सोमवार को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट का परीक्षण करके पक्षकार अपने दावे और आपत्तियां 16 मार्च से पहले लिखित में उपलब्ध कराएं। इसके बाद मामले को सुनवाई में लिया जाएगा।  |
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