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सैकड़ों शिकायतों और दर्जनों कारण बताओ नोटिसों के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं की गई है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल में पांच मार्च को होने वाले चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग अपनी सुस्ती के कारण तीखी आलोचनाओं के घेरे में है। 19 जनवरी से लागू आचार संहिता के उल्लंघन की सैकड़ों शिकायतों और दर्जनों कारण बताओ नोटिसों के बावजूद, अब तक किसी भी उम्मीदवार या दल पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने चुनाव नियमों के उल्लंघन के आरोपित व्यक्तियों और संस्थानों से लिखित स्पष्टीकरण मांगने के लिए 79 पत्र जारी किए हैं। इनमें से नौ को बार-बार उल्लंघन के आरोप लगने के बाद दोबारा स्पष्टीकरण देने को कहा गया। फिर भी, कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। बार-बार उल्लंघन और आयोग की हिचकिचाहट आयोग के भीतर से ही असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका काम स्पष्टीकरण मांगना और उसे आयुक्तों के सामने पेश करना है, लेकिन यह समझ से परे है कि वे कार्रवाई करने से क्यों हिचकिचा रहे हैं। गंभीर मामलों में धा¨डग-1 से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी उम्मीदवार आशिका तामांग शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर स्कूल के भीतर प्रचार किया और बच्चों का इस्तेमाल किया।
इसी तरह, जाजरकोट से उम्मीदवार शक्ति बहादुर बस्नेत पर चुनाव प्रचार के दौरान पैसे बांटने का आरोप है। दोनों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिए, फिर भी आयोग केवल नोटिस तक सीमित है। मेनिफेस्टो और बैंक खातों के नियमों की अनदेखी आचार संहिता का उल्लंघन केवल प्रचार तक सीमित नहीं है। चुनाव लड़ रहे 68 दलों में से आधे से अधिक, जिनमें नेपाली कांग्रेस और यूएमएल जैसे बड़े दल शामिल हैं, 15 फरवरी की समयसीमा तक अपना घोषणापत्र प्रकाशित करने में विफल रहे।
इसके अलावा, 3,406 उम्मीदवारों में से केवल 671 ने ही चुनाव खर्च के लिए अनिवार्य बैंक खाते खोले हैं। पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। एक लाख रुपये तक के जुर्माने या छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की शक्ति होने के बावजूद आयोग की खामोशी चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)  |
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