फाइल फोटो।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। ACB ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दो पन्नों का पत्र लिखकर मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य और दस्तावेजों की मांग की है।
ACB ने पत्र में क्या पूछा?
ACB ने ED से उन तमाम संपत्तियों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय दस्तावेजों का ब्यौरा मांगा है, जिन्हें जांच के दौरान जब्त किया गया है। पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां मांगी गई हैं:
- अब तक किन-किन आरोपितों के विरुद्ध क्या साक्ष्य मिले हैं?
- जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों (मोबाइल, लैपटॉप आदि) की जांच में क्या तथ्य सामने आए हैं?
- यदि किसी आरोपित का कबूलनामा या बयान दर्ज किया गया है, तो उसकी प्रमाणित प्रति।
- वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों का विश्लेषण।
केस का बैकग्राउंड: 2025 से चल रही है जांच शराब घोटाले में ACB ने 20 मई 2025 को कांड संख्या 9/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी दिन उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इस मामले में अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। हालांकि, समय पर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण कई आरोपित तकनीकी आधार पर जेल से बाहर आ चुके हैं, जिसे लेकर हाल ही में विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष ने सरकार को घेरा था।
ED की भूमिका और ECIR ACB द्वारा दर्ज प्राथमिकी को आधार बनाकर ED ने भी ECIR दर्ज की है। ED इस समय प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत धन के अवैध प्रवाह की जांच कर रही है। हाल ही में ED ने मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसियों के निदेशकों से भी लंबी पूछताछ की है। फिलहाल, ED की ओर से ACB के इस पत्र का आधिकारिक जवाब मिलना बाकी है। माना जा रहा है कि दोनों एजेंसियों के बीच साक्ष्यों के आदान-प्रदान से इस बड़े घोटाले की परतें जल्द खुलेंगी।  |