सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। सोमवार को विधानसभा में किसान हितैषी घोषणा को मोहन सरकार ने 24 घंटे के भीतर निर्णय में परिवर्तित कर दिया। मंगलवार को विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के सभागार में हुई कैबिनेट की बैठक में 10,500 करोड़ रुपये की पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी। साथ ही उड़द के उपार्जन पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त किसानों को प्रति क्विंटल छह सौ रुपये बोनस देने और सरसों को भावांतर योजना के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया गया।
कैबिनेट के निर्णय की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में दी। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के आने की वजह से यह निर्णय किए गए हैं। पहले इन पर निर्णय क्यों नहीं किया गया।
28 फीसदी बढ़ा सरसों उत्पादन
उन्होंने बताया कि कैबिनेट की बैठक किसानों को समर्पित रही। देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने दलहन फसल उड़द एवं तिलहन फसल सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उड़द को हम तय समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे और 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी देंगे। प्रदेश में सरसों का उत्पादन इस वर्ष 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इसे भावांतर योजना के दायरे में लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा लगभग 10,500 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच किसान मित्र योजनाओं को अगले पांच सालों तक निरंतर रखने का निर्णय लिया गया। किसानों के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल सुधार होगा।
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इन योजनाओं को दी मंजूरी
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना- 2008 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना को मंजूरी दी गई। इसमें कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति सरकार करेगी।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- 2393.97 करोड़ रुपये की यह योजना 31 मरर्च 2031 तक निरंतर रहेगी। इसमें किसानों को अपने खेतों में स्प्रिंकलर/ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने के लिए अनुदान दिया जाता है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजना- 3285.49 करोड़ रुपये यह योजना भी पांच साल जारी रहेगी। इसमें ऐसे किसान, जो धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज, नगदी फसलों का पैदावार करते हैं, उन्हें क्षेत्र विस्तार, अपना उत्पादन बढ़ाने एवं मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग मिलता रहेगा।
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग- 1011.59 करोड़ रुपये की आगामी पांच वर्ष तक निरंतर रहने वाली इस योजना में प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल में विस्तार देने पर जोर रहेगा। यह न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है बल्कि मिट्टी की उर्वरता में सुधार, उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण सुरक्षा एवं रसायन मुक्त खाद्य उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- 1793.87 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से प्रदेश के ऐसे सभी किसानों को, जो तिलहन फसलों का उत्पादन करते हैं।  |
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