LHC0088 • 4 hour(s) ago • views 976
सुप्रीमकोर्ट का फाइल फोटो।
जागरण संस, अनुगुल। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए उच्चतम न्यायालय ने निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि लाखों की संख्या में प्राप्त दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए ओडिशा और झारखंड से अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की जाए।
80 लाख से अधिक दावों का अंबार सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत 80 लाख से अधिक दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। वर्तमान में लगभग 250 जिला न्यायाधीश इस कार्य में जुटे हैं, लेकिन इस विशाल संख्या को देखते हुए प्रक्रिया पूरी करने में कम से कम 80 दिन का समय लग सकता है। समयसीमा की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने अतिरिक्त न्यायिक बल की आवश्यकता पर मुहर लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर सिविल न्यायाधीशों के साथ-साथ ओडिशा और झारखंड के कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया जा सकता है।
- खर्च का वहन: प्रतिनियुक्त अधिकारियों के यात्रा, आवास और मानदेय का पूरा खर्च भारत निर्वाचन आयोग (ECI) उठाएगा।
- प्रतिष्ठा का प्रश्न: चुनावी प्रक्रिया जैसे संवेदनशील कार्य में भागीदारी को ओडिशा और झारखंड की न्यायिक निष्पक्षता पर राष्ट्रीय विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।
28 फरवरी 2026 तक अंतिम सूची
अदालत ने निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 28 फरवरी 2026 की समयसीमा को बरकरार रखा है। यदि इस तिथि तक कुछ मामलों का निस्तारण शेष रह जाता है, तो उन्हें पूरक मतदाता सूची (SupplementaryList) के माध्यम से अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा।
विसंगतियों पर पैनी नजर
मतदाता सूची में अभिभावकों के नाम में त्रुटि और आयु में अंतर जैसी तार्किक विसंगतियों (Logical Inconsistencies) पर भी अदालत ने चिंता जताई है। अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य इन विसंगतियों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे।  |
|