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झारखंड बजट 2026: सभी मेडिकल कॉलेजों में होगा हार्ट का इलाज, कैंसर की जांच के लिए लगेंगी मशीनें

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बिहार सरकार ने पेश किया बजट। फोटो जागरण



राज्य ब्यूरो, रांची। पहली बार स्वास्थ्य के बजट में कैंसर तथा हृदय रोग के बढ़ते मामले को लेकर बजट में चिंता दिखी है। पिछले 10 वर्षों में झारखंड में कैंसर के मामले में बेतहाशा वृद्धि हुई है। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की भी बड़ी समस्या रही है।

समय पर कैंसर की पहचान होने से उसका इलाज संभव है। इसे ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेज में पेट एंड सीटी स्कैन मशीन लगाने की घोषणा की गई है।

इनमें धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज , जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज , पलामू के मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज , हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज तथा दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज सम्मिलित हैं।

प्रारंभिक अवस्था में ही महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की पहचान हो सके, इसे लेकर राज्य के सभी जिलों के सदर अस्पतालों में मैमोग्राफी मशीन लगाने की घोषणा भी बजट में की है। हृदय राेग के इलाज के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों में कैथलैब की स्थापना भी की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज विकसित करने की योजना

वर्तमान में यह रिम्स, रांची में उपलब्ध है, जबकि रांची सदर अस्पताल में कैथलैब की स्थापना की जा रही है। राज्य में चिकित्सकों खासकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है।

इसे ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक मेडिकल कॉलेज खोलने तथा एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के प्रयास की झलक भी बजट में दिख रही है।

चालू वित्तीय वर्ष के बजट में राज्य सरकार ने धनबाद, गिरिडीह, जामताड़ा एवं खूंटी सदर अस्पताल को पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी।

इस पर अग्रेत्तर कार्रवाई की जा रही है। दूसरे चरण में लातेहार, साहिबगंज तथा सरायकेला खरसावां स्थित सदर अस्पताल को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की घोषणा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में की गई है।
एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई जाएंगी

वहीं, डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए रिम्स सहित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 220 सीटें बढ़ाने तथा अगले चार वर्षों में एमबीबीएस की सीट को 1,030 से बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य बजट में रखा गया है।

इसी तरह, मेडिकल कॉलेज में पीजी की वर्तमान 225 सीटों को अगले वर्ष 325 तथा चार वर्षों में 750 करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को पाने में स्वास्थ्य विभाग सफल रहता है, तो निश्चित रूप से राज्य में डाक्टरों की कमी दूर होगी।

बजट में लोगों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण दवा उपलब्ध कराने के लिए 750 अबुआ दवाखाना खोलने की भी घोषणा की गई है। इसका लाभ मरीजों को तभी मिलेगा, जब उन दवाखानों में दवा की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

अक्सर देखा जाता है कि जेनेरिक दवा की दुकानों में दवा ही उपलब्ध नहीं रहती। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना तथा मुख्यमंत्री अस्पताल कायाकल्प योजनाओं को जारी रखने का निर्णय लिया है। इससे सरकारी अस्पतालों को छोटी-मोटी जरूरता, दवा आदि के लिए मुख्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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