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जम्मू-कश्मीर में अप्रैल से शुरू होगी मतदाता सूचियों की एसआइआर, प्रदेश में अवैध रूप से बसे लोगों में मची खलबली

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एसआइआर से अवैध मतदाताओं के नाम सूची से हटने की उम्मीद।



जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर प्रदेश में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआइआर) अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अप्रैल महीने से यह प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। गत दिनों आयोग ने एक संवाद भेज कर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी को इसकी तैयारियां करने का निर्देश दिया था।

जम्मू-कश्मीर में चूंकि मुख्य चुनाव अधिकारी का पद रिक्त पड़ा था, लिहाजा यह संवाद आने के बाद इस रिक्त पद को भी भरते हुए सरकार ने सेवानिवृत आईएएस अधिकारी शांतमनु को राज्य का चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया। ऐसे में साफ है कि अब अप्रैल से एसआइआर की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी।

भारत निर्वाचन आयोग के इस कदम से जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक हलचल तो तेज हो ही गई है, जम्मू शहर में अवैध रूप से बसे लोगों में खलबली मच गई है। केंद्र शासित प्रदेश की इस राजधानी में लाखों की संख्या में बाहरी राज्यों व बाहरी देशों के लोग अवैध रूप से बसे हुए है और सालों से यहां मतदान प्रक्रिया को भी प्रभावित करते आ रहे हैं।

ऐसे में एसआइआर होने से इन अवैध मतदाताओं के नाम सूची से हटने की पूरी उम्मीद है जिसका कुछ राजनीतिक दलों को लाभ होगा तो कुछ को इसका नुकसान भी उठाना पड़ेगा। जम्मू जिले की बात करें तो वर्ष 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जिले में कुल 11 लाख 96 हजार 153 मतदाता थे लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो एसआइआर के बाद कम से कम इनमें से एक से दो लाख मतदाता कम हो जाएंगे क्योंकि यहां कई अवैध बस्तियां है जहां रोहिंग्या व बंगलादेशी नागरिकों तक ने अपने वोट बना लिया है।
कांग्रेस ने फिलहाल इस मुद्दे पर साधी हुई है चुप्पी

इसके अलावा हजारों लोग ऐसे है जो दूसरे जिलों के रहने वाले है और उन्होंने अपने पैतृक निवास का वोट बनाने के साथ जम्मू में भी अलग से वोट बना लिया है। ऐसे में एसआइआर होने से ये सब नाम मतदाता सूचियों से हटेंगे। वहीं जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधी हुई है।

नेशनल कांफ्रेंस के जम्मू प्रांतीय अध्यक्ष रतन लाल गुप्ता ने कहा कि अभी पार्टी में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। यह एक नीतिगत मुद्दा है और पार्टी बहुत जल्द अधिकारिक तौर पर इस पर अपना पक्ष रखेगी। वहीं प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष रमन भल्ला ने भी एसआइआर के मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इंकार करते हुए कहा कि पार्टी जल्द ही इस पर अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया देगी।

इस बीच भाजपा के नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने एसआइआर का स्वागत करते हुए कहा कि इसका विरोध सिर्फ वहीं राजनीतिक दल कर सकता है, जो चुनाव जीतने के लिए घुसपैठियों का सहारा लेते हैं।
जम्मू-कश्मीर में एसआरआइ अति महत्वपूर्ण


जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद प्रदेश की दृष्टि से एसआरआइ अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले अनुच्छेद 370 की आड़ में कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दल अपने फायदों के लिए मतदाता सूचियों से खिलवाड़ करते रहे। जम्मू-कश्मीर में आज तक जितने भी जनगणना सर्वेक्षण हुए, उसे भी इन राजनीतिक दलों ने अपने फायदों के लिए तोड़मोड़ कर तैयार किया।

इन दलों ने अपने फायदों के लिए जब जनगणना सर्वेक्षण में ही फर्जीवाड़ा किया है, तो मतदाता सूचियों में किस हद तक फर्जीवाड़ा किया होगा, अंदाजा लगाना मुश्किल है। अब तो एसआइआर होने के बाद सभी घुसपैठिएं बाहर होंगे और वास्तविक मतदाता सामने आएंगे जिससे चुनाव प्रक्रिया वास्तव में निष्पक्ष व पारदर्शी बन पाएगी। - एडवोकेट अंकुर शर्मा, भाजपा प्रवक्ता

वर्ष 2024 के चुनाव में जम्मू जिले में विधानसभा स्तर पर मतदाताओं की संख्या

  • बिश्नाह : 1,19,782
  • सुचेतगढ़ : 1,12,819
  • आरएसपुरा-जम्मू साऊथ : 1,29,092
  • बाहू : 1,20,693
  • जम्मू ईस्ट : 1,06,877
  • नगरोटा : 95,573
  • जम्मू वेस्ट : 1,05,852
  • जम्मू नार्थ : 1,11,228
  • मढ़ : 93,300
  • अखनूर : 95,265
  • छंब : 1,05,672


  • कुल : 11,96,153
  
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