एयर एंबुलेंस क्रैश में डॉ. विकास की मौत ( डॉ विकास की फाइल फोटो)।
डिजिटल डेस्क, पटना। Ranchi plane crash: Ranchi से दिल्ली जा रही रेडबर्ड एयरवेज की एयर एंबुलेंस सोमवार शाम चतरा जिले में क्रैश हो गई। इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास कुमार गुप्ता भी शामिल थे। विमान ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से 7:11 बजे उड़ान भरी थी। 7:34 बजे खराब मौसम के कारण पायलट ने मार्ग परिवर्तन की अनुमति मांगी। कुछ ही देर बाद विमान का रडार संपर्क टूट गया। बाद में मलबा सिमरिया थाना क्षेत्र के जंगल में मिला।
बिहार के रहने वाले थे डॉ. विकास
Vikas Kumar Gupta मूल रूप से बिहार के निवासी थे, लेकिन वर्षों से रांची में रह रहे थे। वे रांची सदर अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत थे। पत्नी एसबीआई की कचहरी शाखा में कार्यरत हैं। उनका एक 8 साल का बेटा है, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया। डॉ. गुप्ता मेडिकल इवैक्यूएशन मिशनों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनकी असामयिक मौत से चिकित्सा जगत में गहरा शोक है।
65% जले मरीज को ले जाया जा रहा था दिल्ली
विमान में 41 वर्षीय संजय कुमार भी सवार थे, जो 65% तक झुलस गए थे। लातेहार के चंदवा निवासी संजय को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया गया था। परिजनों ने आर्थिक तंगी के बावजूद एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी।
उम्मीदों से भरी यह उड़ान उनका अंतिम सफर बन गई। विमान में दो पायलट, डॉक्टर, पैरामेडिक और दो अटेंडेंट भी सवार थे। हादसे में कोई भी जीवित नहीं बच सका।
DGCA और AAIB कर रही जांच
Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने हादसे की पुष्टि की है। विमान Beechcraft King Air C90 (VT-AJV) मेडिकल मिशन पर था।
Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) की टीम दिल्ली से जांच के लिए रवाना हुई है। ब्लैक बॉक्स और मौसम संबंधी कारणों की पड़ताल की जा रही है। शाम 8:05 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। जांच रिपोर्ट के बाद ही हादसे की असली वजह स्पष्ट होगी।
गांव से लेकर रांची तक मातम
डॉ. विकास की मौत की खबर से उनके पैतृक गांव में शोक की लहर है। रांची के चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों में भी गहरा दुख है। बताया जाता है कि हादसे से एक दिन पहले ही उन्होंने सेना के एक जवान को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया था। ऐसे जीवनरक्षक डॉक्टर का यूं चला जाना सभी को स्तब्ध कर गया।
उनकी पत्नी और छोटे बेटे के लिए यह समय बेहद कठिन है। मरीज की जिंदगी बचाने निकले डॉक्टर की आखिरी उड़ान अब एक दर्दनाक याद बन चुकी है।
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