पलवल जिला प्रशासन ने अज्ञात बीमारी को लेकर जानकारी दी।
जागरण संवाददाता, पलवल। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग गांव छांयसा में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमें 24 घंटे सक्रिय रूप से गांव में चेकिंग अभियान चलाकर लोगों की चेकिंग कर रही हैं। गांव में 11 फरवरी के बाद से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है और स्थिति अब पहले से सामान्य है।
उपायुक्त सोमवार को गांव छांयसा के लोगों को अज्ञात बीमारी के प्रकोप से बचाव के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए गए आवश्यक प्रबंधों की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर एसडीएम हथीन अप्रतिम सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल बीमारी पर नियंत्रण पाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना भी है।
गांव छांयसा में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई से लोगों में भरोसा बढ़ा है और वे जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने ग्रामीणों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य शिविर या नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच करवाएं ताकि समय पर इलाज संभव हो सके और बीमारी के फैलाव को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा टीम बनाकर एनर्जी ड्रिंक व झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जांच अभियान चलाकर आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उपायुक्त ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव में निरंतर स्वास्थ्य निगरानी रखी जाए और किसी भी संदिग्ध मरीज की तुरंत जांच कर उपचार सुनिश्चित किया जाए। गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है, जिसमें रक्त जांच, परामर्श और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य टीम घर-घर जाकर लोगों को जागरूक भी कर रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को पैनिक होने या घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सावधानी और जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इलाज केवल पंजीकृत डॉक्टरों से ही करवाएं और किसी भी प्रकार के झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में आने से बचें। उन्होंने चेतावनी दी कि एक ही सिरिंज या सुई का दोबारा प्रयोग संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण बन सकता है, इसलिए इससे बचना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा दूषित पानी से भी बीमारी के फैलने की अधिक संभावना है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सुई के माध्यम से ड्रग्स का सेवन करता है तो उसकी सूचना तुरंत जिला प्रशासन को दें ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा गांव में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं बारे आवश्यक कदम उठाए गए हैं। गांव में तीन अलग-अलग स्थानों आईएमडी स्कूल के पास, एक अन्य स्कूल परिसर तथा पंचायत क्षेत्र में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। ये स्वास्थ्य शिविर 2 फरवरी से लगातार संचालित किए जा रहे हैं, जहां लोगों की जांच कर उचित परामर्श दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंप में हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी, ओटी तथा लिवर फंक्शन आदि टेस्ट किए जा रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर सरकारी हेल्पलाइन नंबर 01275-240022 पर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है। उपायुक्त ने ग्रामीणों से आह्वान करते हुए स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियां अपनाने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक बार इस्तेमाल होने वाली सिरिंज का दोबारा प्रयोग बिल्कुल न करें और इलाज केवल पंजीकृत डाक्टर से ही करवाएं। झोलाछाप के चक्कर में न आए।
उन्होंने लोगों को साफ पानी पीने, पानी को उबालकर उपयोग करने तथा स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गांव में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें युवाओं को ड्रग्स से दूर रहने, टैटू बनवाते समय स्वच्छ उपकरणों का प्रयोग करने और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार कार्य कर रही हैं। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे रैनीवैल वाटर का अधिक से अधिक प्रयोग करें।
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