भारत में दुनियाभर की 15 जानें सड़क हादसों में जाती है।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। भारत के पास विश्व के लगभग एक प्रतिशत वाहन हैं, पर वैश्विक सड़क मौतों में इसकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है। हेलमेट जीवन बचाने का सबसे प्रभावी साधन है, पर तभी जब वह सुरक्षा मानकों पर खरा हो। पिछले वर्ष दिल्ली में बिके लगभग 70 प्रतिशत हेलमेट फर्जी थे। यदि सुरक्षित हेलमेट एक वैक्सीन है, तो फर्जी हेलमेट नकली वैक्सीन के समान है।
यह बातें भारत के सड़क सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए सोमवार को चाणक्यपुरी में आयोजित \“\“मिशन: सेव लाइव्स आन रोड्स\“\“ कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत (रोड सेफ्टी) जीन टॉड ने कही। उन्होंने राजधानी दिल्ली में पिछले पांच वर्षों में बाइक दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 38 प्रतिशत वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। साथ ही निजी क्षेत्र से गुणवत्ता और किफायती सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की अपील की।
उन्होंने भारत की हालिया पहलों की सराहना करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि नीतियों को जमीनी स्तर पर पूरी सख्ती से लागू किया जाए। विशेषज्ञों ने वैश्विक सड़क हादसों में होने वाली मौतों में भारत की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी को खत्म करने के लिए राष्ट्रव्यापी सख्त इंफोर्समेंट और बाइक पर दो हेलमेट की अनिवार्य नीति लागू करने की अपील मांग की।
वहीं बाइक निर्माता कंपनियों से प्रत्येक बाइक के साथ न्यूनतम लागत पर दो असली हेलमेट अनिवार्य रूप से देने का आग्रह किया गया। ओवरस्पीडिंग खत्म करने के लिए एआइ आधारित हेलमेट सेंसर और जीपीएस स्पीड लिमिटर का भी प्रस्ताव रखा गया। स्टीलबर्ड हाई-टेक इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजीव कपूर ने कहा कि सड़क मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उद्योग, सरकार और समाज को एकजुट होकर कार्य करना होगा।
बाइक की स्पीड पर सेंसर का नियंत्रण
राजीव कपूर ने भविष्य की तकनीकों का उल्लेख करते हुए प्रस्तुतिकरण दिया कि एआई आधारित हेलमेट सेंसर, जो तब तक अलार्म दें जब तक चालक और पीछे बैठा व्यक्ति दोनों हेलमेट न पहन लें। वहीं जीपीएस आधारित स्पीड लिमिटर, जो निर्धारित सीमा से अधिक गति को स्वतः रोक देता है। कार्यक्रम में चार प्रमुख तकनीकी सत्र आयोजित किए गए जिनमें सुरक्षित जंक्शन डिजाइन, ब्लैक स्पॉट सुधार, समावेशी और जन-केंद्रित परिवहन व्यवस्था, पावर्ड टू-व्हीलर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और सेफ सिस्टम अप्रोच के तहत सर्वोत्तम हस्तक्षेपों पर परिचर्चा की गई। विशेषज्ञों ने सड़क के डिजाइन को इस तरह रखने पर भी जोर दिया कि मानवीय त्रुटि के बावजूद हादसों में जान-माल की न्यूनतम क्षति हो।
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