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MP में वक्फ संपत्तियों के पंजीयन में गड़बड़ी, 77 करोड़ की जमीन पर सवाल; CAG की रिपोर्ट में खुलासा

deltin33 3 hour(s) ago views 787
  

राज्य वक्फ बोर्ड (प्रतीकात्मक चित्र)



राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विधानसभा में पेश नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वक्फ संपत्तियों के पंजीयन में व्यापक गड़बड़ियां हुईं। रिपोर्ट के अनुसार सामुदायिक उपयोग और सरकारी प्रयोजन के लिए आरक्षित भूमि को भी वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य 77 करोड़ रुपये बताया गया है।
कलेक्टर की आपत्तियां नजरअंदाज

जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में जिला प्रशासन की आपत्तियों को दरकिनार कर पंजीयन किए गए। धार जिले की बसंत विहार कॉलोनी में दो आवेदकों ने अपने 66.87 वर्गमीटर के मकानों को मस्जिद उद्देश्य से वक्फ के रूप में दर्ज कराने आवेदन दिया था। कलेक्टर ने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने से इंकार किया, लेकिन 18 नवंबर 2022 को बोर्ड ने 30 दिन की समय-सीमा समाप्त होने का हवाला देकर संपत्तियों का पंजीयन कर दिया। बाद में कलेक्टर ने पंजीकरण निरस्त करने का आदेश भी जारी किया, पर मामला न्यायाधिकरण में लंबित है।

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रिपोर्ट में उल्लेख है कि जांची गई 81 संपत्तियों में से लगभग आधी सरकारी भूमि पाई गईं।
स्कूल-पुलिस स्टेशन की जमीन भी ‘कब्रिस्तान’ बताकर दर्ज

  • भोपाल के मिसरोद क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया, जहां जिस जमीन पर स्कूल और पुलिस स्टेशन संचालित हैं, उसे कब्रिस्तान दर्शाकर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया गया। तहसीलदार और थाना प्रभारी की आपत्तियों के बावजूद पंजीयन किया गया।
  • इसी तरह विदिशा जिले के हलाली जलाशय क्षेत्र में 410 वर्गमीटर वन भूमि को वक्फ के रूप में दर्ज किया गया, जबकि वह वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत पट्टे पर दी गई थी। जनवरी 2023 में इसे औकाफ रजिस्टर में शामिल कर लिया गया।
  • भोपाल के संजय नगर लेंडिया तालाब क्षेत्र की 19.80 वर्गमीटर भूमि, जिसे वर्ष 1994 में 30 वर्ष के पट्टे पर दिया गया था और जिसका स्वामित्व शासन के पास सुरक्षित था, उसे भी 2021 में वक्फ के रूप में दर्ज कराने का आवेदन किया गया। रिपोर्ट में इसे अवैध कब्जे का मामला बताते हुए शासन को हस्तक्षेप की सलाह दी गई है।

किराया संशोधन न होने से करोड़ों का नुकसान

वक्फ प्रबंधन समिति के अभिलेखों की जांच में सामने आया कि भोपाल में 3,887 आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों का मासिक किराया मात्र दो रुपये तक वसूला जा रहा था। दिसंबर 2020 में समिति ने बोर्ड को सूचित किया कि पट्टा नियम 2020 के अनुसार वसूल योग्य किराए और वास्तविक किराए में लगभग 1.35 करोड़ रुपये प्रतिमाह का अंतर है।

इसके अलावा 14 हजार से अधिक पंजीकृत वक्फ संपत्तियों में से वर्ष 2018-19 से 2020-21 के दौरान केवल 2 से 3 प्रतिशत ने ही अपने लेखे-जोखे बोर्ड को प्रस्तुत किए।

रिपोर्ट के सामने आने के बाद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कार्रवाई करती है।   
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