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धार भोजशाला विवाद : ASI की जिस सर्वे रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट सीलबंद मान रहा था, वह दो साल से पक्षकारों के पास

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धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 98 दिन तक किए गए सर्वे की जिस विस्तृत रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट सीलबंद मान रहा था, वह दो साल से पक्षकारों के पास है। यह पर्दाफाश सोमवार को तब हुआ, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सर्वे रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी।

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि सर्वे रिपोर्ट पूर्व में ही पक्षकारों को दी जा चुकी है, लेकिन यह जानकारी न शासन ने सुप्रीम कोर्ट को दी, न पक्षकारों ने। हालांकि इसके पीछे किसी की कोई दुर्भावना नहीं थी। इस पर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि रिपोर्ट पक्षकारों के पास है तो वे चाहें तो इसे लेकर अपने सुझाव, आपत्ति 16 मार्च से पहले लिखित में कोर्ट में दे सकते हैं। आपत्ति, सुझाव पर सुनवाई के बाद कोर्ट इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिए नियत कर देगी।
एक साथ हुई सुनवाई

बता दें कि भोजशाला मामले को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील चल रही है। सोमवार को इन सभी की सुनवाई एक साथ हुई। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट की युगलपीठ ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को आदेश दिया था कि वह ज्ञानवापी की तरह भोजशाला का भी विज्ञानी सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह सर्वे 98 दिन चला। इसके बाद एएसआई ने 2189 पेज की सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी।

चार जुलाई 2024 को हाई कोर्ट के आदेश पर इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि सभी पक्षकारों को उपलब्ध करवाई गई थी। इस बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रखने के आदेश दिए थे। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ को सरस्वती (वाग्देवी) मंदिर बनाम कमाल मौलाना दरगाह-मस्जिद विवाद में भोजशाला के वास्तविक स्वरूप पर निर्णय करना है।

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पक्षकारों ने बताया, क्या है सर्वे रिपोर्ट में

  • एएसआई सर्वे रिपोर्ट की प्रति रखने वाले पक्षकारों का दावा है कि भोजशाला परिसर में मिले स्तंभों की कला और वास्तुकला मंदिर शैली की ओर संकेत करती है। उनके अनुसार, -ये स्तंभ मूल रूप से मंदिर का हिस्सा थे, जिन्हें बाद में मस्जिद निर्माण के दौरान पुन: उपयोग में लाया गया। मौजूदा संरचना में कुल 188 स्तंभ (106 सीधे और 82 आड़े) पाए गए हैं, जिन पर देवताओं, मानव और पशु आकृतियों के विकृत किए जाने के संकेत भी मिले हैं।
  • सर्वे के दौरान संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख भी सामने आए हैं, जिनमें परमार वंश के राजा नरवर्मन (1094-1133 ई.) का उल्लेख शामिल है। कुछ स्तंभों पर ‘कीर्तिमुख’ सहित आकृतियां सुरक्षित अवस्था में पाई गई हैं।
  • इसके अलावा दीवारों और खिड़की के फ्रेम पर उकेरी गई देव प्रतिमाएं अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में मिली हैं। सर्वे में 94 मूर्तियां मिली हैं, जिनमें गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह, भैरव सहित विभिन्न देवी-देवताओं और पशु आकृतियां शामिल हैं। साथ ही 30 परमारकालीन सिक्के और बहुमंजिला संरचना के संकेत भी मिले हैं। कुछ स्तंभों पर ‘ऊं सरस्वतै नम:’ अंकित है।

सर्वे रिपोर्ट का यह निष्कर्ष

  • सर्वे रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि वर्तमान संरचना यानी कमाल मौलाना दरगाह के निर्माण में पहले से मौजूद मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया था। मंदिर के उक्त हिस्से परमारकालीन थे।
  • रिपोर्ट में सर्वे के दौरान एकत्रित किए 1700 से ज्यादा प्रमाण और खोदाई में मिले अवशेषों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट का निष्कर्ष 151 पेज में संकलित किया गया है। प्रमाण स्पष्ट इंगित करते हैं कि भोजशाला एक मंदिर ही है।
  • एक शिलालेख भी मिला है, जिसमें कहा है कि भोजशाला पर आक्रमण हुआ था और तोड़फोड़ भी की गई थी। यहां की मूर्तियों को तोड़कर इस परिसर को मस्जिद में बदला गया था।


इन तथ्यों के आधार पर मंदिर स्वरूप के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत ही होगा।
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