टेस्टिंग में ही फेल हुई माधोरामपुर पेयजल परियोजना।
जागरण संवाददाता, चौरी (भदोही)। दैनिक जागरण में 19 से 21 फरवरी तक जल जीवन मिशन के तहत सूखे नल झूठे वादे अभियान चलाया। इसको लेकर जिला प्रशासन ने जल निगम व कार्यदायी संस्थाओं पर सख्ती की तो तैयार परियोजनाओं की टेस्टिंग होने लगी। भदोही ब्लाक के माधोरामपुर गांव में रविवार की शाम पेयजल परियोजना की टेस्टिंग की गई लेकिन यह चालू हाेते ही फेल हो गई।
लोहे की चादर से बने ओवरहेड टैंक में पानी पहुंचते ही वह छह स्थानों पर टपकने लगा। टंकी से झर-झर गिर रहे पानी को देखते ही कर्मियों नलकूप बंद करा दिया।
नौ हजार की आबादी को शुद्ध पेयजल के लिए तीन साल में तैयार हुई इस परियोेजना पर सवाल खड़ा हो गया है। हालांकि कार्यदायी संस्था व जिला प्रशासन द्वारा कहा जा रहा कि यह लीकेज ठीक करा दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो टंकी बदली जाएगी।
पेयजल परियोजना 2023 में शुरू हुई थी। इसके तहत माधोरामपुर व परसीपुर गांव की मुख्य सड़क से होते हुए हर गली मोहल्ले के अलावा हर दरवाजे तक पाइपलाइन बिछाई गई। दोनों गांवों में लगभग 4200 कनेक्शन की दिए गए हैं।
उद्देश्य यह कि दोनों गांवों की नौ हजार की आबादी को शुद्ध पेयजल मिलने लगे। परियोजना में आई गड़बड़ी के कारण अभी देरी हो सकती है।
ग्रामीणों के अनुसार परियोजना कार्य का कार्य शुरुआत में तेजी से हुआ लेकिन उसके बाद काम धीमी गति से होने लगा। स्थिति यह कि परियोजना को डेढ़ साल में चला देना चाहिए था लेकिन तीन साल में भी चल सकी।
हाई टेंशन तार का भी नहीं रखा ध्यान
माधोरामपुर गांव में बनी पेयजल योजना के निर्माण में लापरवाही तो टेस्टिंग के दौरान ही सामने आ गई। बड़ी खामी यह कि ओवरहैड टैंक के पास से ही 11 हजार वोल्ट का तार गुजर रहा है।
ओवरहैड टैंक से मार चार फीट दूर इस लाइन से कभी भी हादसा हो सकता है। कार्यदायी संस्था व विभागीय अधिकारियों ने इस खतरे का तनिक भी संज्ञान नहीं लिया।
ओवरहेड टैंक में लीकेज ठीक करा दिया जाएगा। अभी यह टेस्टिंग में है, लोहे की टंकियां बनी बनाई आती हैं। इसे बदलवा दिया जाएगा। वैसे कोई भी परियोजना शुरू होने पर उसकी देखरेख दस साल कार्यदायी संस्था करेगी। उसके बाद उसे ग्राम पंचायत को हैंडओवर किया जाएगा। लोहे की टंकी में लीकेज सुधरने लायक है तो ठीक है अन्यथा उसे बदलवाया जाएगा। -शैलेष कुमार, जिलाधिकारी।
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