बिहार विधान परिषद में उठा नाम का मुद्दा। सांकेतिक तस्वीर
राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar Politics: सरकारी आयोजनों और कार्यक्रमों में विधानपार्षदों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित तो करना ही होगा, उद्घाटन-शिलान्यास वाले शिलापट पर उनका नाम भी विधायक से ऊपर लिखा जाएगा।
इसका उल्लंघन करने वाले अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। विधानपरिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को आसन से यह नियमन दिया।
भाजपा एमएलसी ने उठाया मुद्दा
दरअसल, भाजपा के तरुण कुमार ने सदन में ध्यानाकर्षण लाते हुए कहा कि विधानपार्षदों को किसी भी विभाग के द्वारा नहीं बुलाया जाता है।
उद्घाटन में भी नहीं पूछा जाता और न ही शिलापट पर नाम रहता है। जदयू के दिनेश सिंह और संजय कुमार सिंह समेत अन्य सदस्यों ने भी यह शिकायत की और बताया कि स्थानीय अधिकारी की मिलीभगत से मुख्यालय से जाने वाला शिलापट हटाकर दूसरा लगा दिया जाता है।
कई बार तो मुख्यमंत्री और मंत्री का नाम भी गायब कर देते हैं। उन्होंने समस्तीपुर के मोरवां के एक शिलापट की तस्वीर भी सदन में दिखाई।
दोषी कार्यपालक अभियंता पर हो रही कार्रवाई
ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि पहले से ही सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय सांसदों-विधायकों के साथ विधानपरिषद के सदस्यों को निमंत्रित करने का निर्देश जारी है।
गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर डीएम को सूचना देकर शिलापट को तुड़वाया गया है। नया शिलापट भी लगवाया जा रहा है, मगर संख्या बहुत ज्यादा है। जिस कार्यपालक अभियंता को दोषी पाया जा रहा, उनसे स्पष्टीकरण मांगते हुए विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
सभापति अवधेश नारायण सिंह ने नियमन दिया कि सरकारी आयोजनों में विधानपरिषद के सदस्य जरूर भाग लेंगे। वे उच्च सदन के सदस्य हैं इसलिए उनका नाम विधायकों से ऊपर लिखा जाएगा। आदेश की अवहेलना पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में सदन की समिति निर्णय लेकर कार्रवाई करेगी। |
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