HPPI Team Visit: हरे-भरे जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर टीम के सदस्य मंत्रमुग्ध नजर आए। फाइल फोटो
संवाद सूत्र, वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण)। Jungle Safari Bihar: अब वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व देशी ही नहीं, बल्कि विभिन्न संस्थाओं और संगठनों के समूह पर्यटन के लिए भी तेजी से आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
इसी कड़ी में ह्यूमन पीपुल टू पीपुल इंडिया (एचपीपीआई) की 70 सदस्यीय टीम ने दो दिवसीय दौरे पर वाल्मीकिनगर पहुंचकर वीटीआर के वन क्षेत्र में जंगल सफारी का रोमांच उठाया।
शनिवार को एचपीपीआई के प्राचार्य, व्याख्याता एवं शिक्षकों की टीम वाल्मीकिनगर पहुंची। एचपीपीआई के राज्य समन्वयक डॉ. नवल ठाकुर ने बताया कि संस्था की वार्षिक योजना की समीक्षा बैठक और वीटीआर भ्रमण के उद्देश्य से यह यात्रा आयोजित की गई।
टीम में पटना, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, गया, अररिया, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर, गोपालगंज, मोतिहारी, पूर्वी चंपारण, लखीसराय, नवादा और जमुई जिलों से आए कुल 70 सदस्य शामिल थे।
एलिफेंटा रिसॉर्ट में बैठक
वाल्मीकिनगर स्थित एलीफेंटा रिसॉर्ट में आयोजित बैठक के दौरान शिक्षा क्षेत्र में सुधार, शिक्षकों के प्रशिक्षण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन एचपीपीआई के मुख्य कार्यालय दिल्ली से आए राजेश कुमार यादव ने किया।
मोर देख उत्साहित हुए सदस्य
टीम ने वीटीआर के घने वन क्षेत्र में जंगल सफारी की। इस दौरान सदस्यों ने गौर (जंगली भैंसा), जंगली सुअर, हिरण, मोर सहित कई वन्यजीवों को बेहद नजदीक से देखा। हरे-भरे जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर टीम के सदस्य काफी रोमांचित और मंत्रमुग्ध नजर आए।
धार्मिक व पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण
टीम के सदस्यों ने पहली बार वाल्मीकिनगर आने का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वीटीआर की खूबसूरती उनकी कल्पना से कहीं अधिक है। भ्रमण के दौरान उन्होंने वाल्मीकि आश्रम, जटाशंकर मंदिर, कालेश्वर मंदिर, नारदेवी मंदिर के दर्शन किए। साथ ही त्रिवेणी स्थित गजेन्द्र मोक्ष दिव्य धाम पहुंचकर दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित मंदिर की उत्कृष्ट कलाकृतियों को भी निहारा।
एचपीपीआई टीम के भ्रमण और जंगल सफारी की व्यवस्था एलीफेंटा रिसॉर्ट्स के प्रोपराइटर आशुतोष द्विवेदी द्वारा की गई थी। टीम के सदस्यों ने वीटीआर की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के संरक्षण की सराहना करते हुए इसे एक अद्वितीय पर्यटन अनुभव बताया। |