तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
जागरण संवाददाता, संभल। शाही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई की अनुमति देने से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने हाथ खड़े कर दिए हैं। एएसआइ के अधिवक्ता विष्णु शंकर शर्मा का कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इस कारण अनुमति न्यायालय से ही लेनी होगी। जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी ने एएसआइ से ईद के मद्देनजर रंगाई-पुताई की अनुमति मांगी थी।
मस्जिद के मंदिर होने का वाद न्यायालय में विचाराधीन है। एक साल पहले भी जामा मस्जिद कमेटी को हाई कोर्ट से सशर्त अनुमति मिली थी। सिविल जज(सीनियर डिवीजन) कोर्ट में 19 नवंबर, 2024 को जामा मस्जिद के मंदिर होने का वाद दायर किया गया था। कोर्ट ने उसी दिन सर्वे का आदेश दिया। 24 नवंबर के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई। जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। जबकि, 30 अधिकारी व पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
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इसके 12 मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन हैं। जामा मस्जिद की इंतेजामिया कमेटी की ओर से एएसआइ से ईद के मौके पर रंगाई पुताई की अनुमति देने की मांग की गई है। इस बारे में एएसआइ के अधिवक्ता का कहना है कि किसी भी कार्रवाई पर उच्चतम न्यायालय से रोक लगाई गई है।
पहले भी कोर्ट के आदेश के बाद ही मस्जिद की रंगाई पुताई हुई थी। अगर मुस्लिम पक्ष पुनः रंगाई पुताई चाहता है तो कोर्ट में प्रार्थना पत्र दे न कि एएसआइ के समक्ष। |