IIT दिल्ली ने पांच साल में तीन दशक जितनी पीएचडी उपाधियां दीं। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश में उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आईआईटी दिल्ली ने मात्र पांच वर्षों में उतनी पीएचडी उपाधियां प्रदान कर दीं, जितनी पहले तीन दशकों में दी गई थीं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच संस्थान ने 2,259 शोधार्थियों को डाक्टरेट उपाधि दी, जो 1966 से 1999 के बीच प्रदान की गई कुल 2,281 उपाधियों के लगभग बराबर है।
संस्थान के अनुसार इस तेज़ वृद्धि का प्रमुख कारण शोध पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए लगातार किया गया निवेश, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रायोजित परियोजनाओं का विस्तार है।
साल 2000 के बाद से लगातार बढ़ रही संख्या
वर्ष 2000 के बाद से पीएचडी संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई, जबकि 2010 के बाद यह रफ्तार और तेज़ हो गई। 2010 से 2019 के बीच 2,376 पीएचडी प्रदान की गईं, जो किसी भी दशक का सर्वोच्च आंकड़ा रहा।
आईआईटी प्रशासन मानता हैं कि शोध उपाधियों में यह वृद्धि देश की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ उद्योग-शिक्षा सहयोग को मजबूत करती है। इससे नई तकनीकों का विकास, नवाचार आधारित उद्योगों को बढ़ावा और भविष्य के शिक्षकों की तैयारी भी सुनिश्चित होती है।
विद्यार्थियों को मिला अंतर्राष्ट्रीय स्तर का अनुभव
शोधार्थियों के लिए बढ़ाई गई छात्रवृत्तियां, आधुनिक प्रयोगशालाएं, उच्च क्षमता संगणन सुविधाएं तथा संयुक्त अंतरराष्ट्रीय पीएचडी कार्यक्रम इस प्रगति के प्रमुख कारक रहे हैं।
संस्थान ने यह भी बताया कि वैश्विक विश्वविद्यालयों के साथ संयुक्त शोध और सह-पर्यवेक्षण माडल से शोध की गुणवत्ता में सुधार हुआ है तथा विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिला है।
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