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मानसून से पहले भंगेल एलिवेटेड रोड के नीचे की सड़क होगी दुरुस्त, 36 करोड़ की लागत से पूरा होगा काम

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भंगेल एलिवेटेड रोड। (फाइल फोटो)



जागरण संवाददाता, नोएडा। दादरी सूरजपुर छलेरा (डीएससी) मार्ग नोएडा के सबसे व्यस्त रूट में गिना जाता है। इसलिए यहां पर प्राधिकरण की ओर से भंगेल एलिवेटेड रोड का निर्माण कराया है, लेकिन उत्तर प्रदेश सेतु निगम ने एलिवेटेड रोड के नीचे का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया, जबकि यह अनुबंध शर्त में शामिल है।

इसको लेकर प्राधिकरण और सेतु निगू से विवाद था, लेकिन अब यह विवाद शांत होता दिखाई दे रहा है, क्योंकि सेक्टर-41 आगाहपुर से फेज-2 तक का हिस्सा उत्तर प्रदेश सेतु निगम की ओर से बनाना शुरू कर दिया है।

करीब 36 करोड़ रुपये की लागत से इस पूरे कॉरिडोर का सुधार कार्य शुरू हुआ है, पूरा करने का लक्ष्य जून रखा गया है, जिससे मानसून से पहले लोगों को इस रास्ते राहत दी जा सके।

बता दें कि अभी तक यह रूट गहरे गड्ढों, धूल और लगातार लगने वाले जाम के कारण लोगों की बड़ी समस्या बना हुआ था, क्योंकि दोनों विभागों के बीच परियोजना की लागत और बकाया भुगतान को लेकर मतभेद पूरी था, जो अब पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक सेतु निगम की ओर से भुगतान संबंधी पत्र लगातार भेजे जा रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि वित्तीय मुद्दे अब भी चर्चा में हैं।

एलिवेटेड रोड के नीचे से फेज-2 की ओर सीधी आवाजाही फिलहाल बंद है। ऐसे में लोगों को सेक्टर-82 बस टर्मिनल और सेक्टर-93 होते हुए लंबा चक्कर लगाकर फेज-2 पहुंचना पड़ रहा है। प्राधिकरण का कहना है कि जहां एलिवेटेड चढ़ता-उतरता है, उसके पास नाला होने के कारण सुरक्षा जोखिम बना हुआ है, इसलिए फिलहाल रास्ता बंद रखा गया है।

बता दें कि लंबे समय से बदहाल पड़ी भंगेल एलिवेटेड रोड के नीचे की सड़क को अब नया रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भंगेल एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क निर्माण शुरू होने से यहां यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।

केवल सड़क ही नहीं, बल्कि ड्रेनेज सिस्टम, यूटर्न और यातायात प्रबंधन से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि चार माह के अंदर सभी सिविल वर्क पूरे किए जाएं, ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके।
कम रोशनी, भारी यातायात का दबाव से सफर मुश्किल

शाम के समय कम रोशनी और भारी ट्रैफिक के कारण सफर करना और मुश्किल हो जाता है। कुछ लोग गड्ढों में गिरकर चोटिल भी हुए हैं। सड़क को जल्द ठीक करने की मांग की जा रही थी। ताकि जुलाई में मानसून शुरू होने पर जलभराव और सड़क टूटने जैसी समस्याएं दोबारा सामने न आएं।

प्राधिकरण और सेतु निगम के बीच करीब छह महीने से विवाद चला आ रहा था। प्राधिकरण ने इस मामले में शासन स्तर तक पत्राचार भी किया था। अब मामला सुलझने के बाद निर्माण गतिविधियां जमीन पर नजर आने लगी हैं।
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