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झारखंड निकाय चुनाव में कांग्रेस की असली ताकत की होगी अग्निपरीक्षा, गठबंधन में बढ़ सकती हैं खींचतान

deltin33 Yesterday 20:56 views 166
  

प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश। (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में निकाय चुनाव इस बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा है। अब तक राज्य की राजनीति में गठबंधन के सहारे अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने वाली कांग्रेस इस बार अपने पारंपरिक सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत अन्य दलों से तालमेल किए बिना चुनावी मैदान में उतर रही है।

ऐसे में यह चुनाव न केवल पार्टी की वास्तविक ताकत को परखेगा, बल्कि उसके संगठनात्मक ढांचे और जनाधार की भी परीक्षा लेगा।

झारखंड में कांग्रेस लंबे समय से गठबंधन राजनीति का हिस्सा रही है। विशेषकर झामुमो के साथ उसकी साझेदारी ने पिछले कई चुनावों में उसे फायदा पहुंचाया है।

लेकिन इस बार बिना समन्वय चुनाव लड़ने का निर्णय पार्टी की बदली हुई रणनीति को दर्शाता है। यह कदम कांग्रेस के आत्मविश्वास को तो दिखाता है, लेकिन इसमें बड़ा जोखिम भी निहित है।

गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ना कांग्रेस को स्वतंत्र पहचान स्थापित करने का मौका देगा, वहीं दूसरी ओर वोटों के बिखराव की आशंका भी बढ़ेगी। यदि विपक्षी वोटों का विभाजन होता है तो इसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है।
जमीनी पकड़ की होगी असली परीक्षा

निकाय चुनाव आमतौर पर स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की लोकप्रियता पर आधारित होते हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह अवसर है कि वह अपने स्थानीय नेतृत्व और संगठन की ताकत को साबित करे।

अब तक गठबंधन के सहारे चुनाव जीतने वाली पार्टी को इस बार अपने बूते मतदाताओं का भरोसा जीतना होगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पार्टी की सक्रियता, बूथ स्तर तक संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की भागीदारी इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यदि कांग्रेस इन मोर्चों पर सफल होती है तो यह उसके लिए भविष्य की राजनीति में सकारात्मक संकेत होगा।
स्थानीय नेतृत्व के सामने चुनौती

इस चुनाव में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। चुनाव भले ही गैर दलीय आधार पर हो रहे हैं। लेकिन प्रत्याशी चयन से लेकर प्रचार रणनीति में हर स्तर पर नेतृत्व की क्षमता की परीक्षा होगी।

यदि पार्टी अपने दम पर अच्छा प्रदर्शन करती है तो यह संकेत होगा कि वह राज्य में स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर सकती है। वहीं, कमजोर प्रदर्शन की स्थिति में उसे फिर से गठबंधन की राजनीति पर निर्भर होना पड़ सकता है।

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