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छपरा के हर चौक पर बदलेगी ट्रैफिक की तस्वीर; जाम से मिलेगी राहत, पुलिस पर भी रहेगी नजर

LHC0088 Yesterday 20:27 views 737
  

ट्रैफिक थाना में पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण देते डीएसपी संतोष पासवान। जागरण  



जागरण संवाददाता, छपरा। वर्षों से जाम की मार झेल रहे छपरा के लोगों के लिए राहत की खबर है। अब हर दिन ऑफिस, स्कूल, अस्पताल और बाजार जाने में फंसने वाला समय कम होगा।

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने ट्रैफिक सिग्नल और आधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित करने की मंजूरी दे दी है।

यह पहल छपरा विधायक छोटी कुमारी द्वारा विधानसभा में उठाए गए सवाल के बाद संभव हो सकी है। योजना मुख्यमंत्री सुशासित शहर योजना के तहत लागू की जाएगी।

प्रमुख चौक-चौराहों और व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे, जबकि शहर की हर हलचल पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार जून 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

विधायक छोटी कुमारी का कहना है कि जाम केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा, समय और जीवन से जुड़ा सवाल है। इस योजना से छात्रों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों—सभी को सीधी राहत मिलेगी।
अब कैमरे की नजर में ट्रैफिक, पुलिस भी जवाबदेह

शहरवासियों के लिए एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब छपरा की सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस बॉडी-वॉर्न कैमरों के साथ ड्यूटी करेगी।

पहले चरण में करीब 150 कैमरे ट्रैफिक जवानों को दिए गए हैं। अब चौक-चौराहों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में हर कार्रवाई कैमरे में रिकॉर्ड होगी।

इससे न सिर्फ नियम तोड़ने वालों पर सख्ती होगी, बल्कि पुलिस और आम नागरिक—दोनों के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी। छोटी-छोटी नोकझोंक, चालान को लेकर विवाद या दुर्व्यवहार के मामलों में अब सच्चाई कैमरे के जरिए सामने आ सकेगी।
भरोसा बढ़ेगा, विवाद घटेगा

पटना में विशेष प्रशिक्षण के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है। ट्रैफिक डीएसपी संतोष कुमार पासवान के अनुसार, ड्यूटी के दौरान की हर गतिविधि रिकॉर्ड होगी। इससे चालान प्रक्रिया निष्पक्ष बनेगी और बेवजह के आरोप-प्रत्यारोप में कमी आएगी।

आम नागरिकों का भी मानना है कि कैमरे की मौजूदगी से सड़क पर व्यवहार बदलेगा। वाहन चालक नियमों के प्रति ज्यादा सजग होंगे और पुलिसकर्मी भी अपनी जिम्मेदारी अधिक सावधानी से निभाएंगे।
सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण में भी मदद

बॉडी-वॉर्न कैमरे सिर्फ ट्रैफिक तक सीमित नहीं रहेंगे। सड़क दुर्घटनाओं, झगड़ों या संदिग्ध गतिविधियों की स्थिति में तुरंत वीडियो साक्ष्य उपलब्ध रहेगा।

इससे जांच तेज होगी और दोषियों की पहचान आसान बनेगी। विशेषज्ञों के अनुसार कैमरे होने से हेलमेट, सीट बेल्ट और ट्रैफिक नियमों के पालन में स्वतः सुधार आता है।
आम लोगों से अपील

ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से सहयोग की अपील की है—हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन से दूरी रखें और नियमों का पालन करें।  

छपरा में तकनीक के सहारे शुरू हुई यह पहल सिर्फ व्यवस्था नहीं, बल्कि आम लोगों के समय, सुरक्षा और भरोसे को लौटाने की कोशिश है। अब सड़क पर हर गतिविधि कैमरे की नजर में होगी—ऐसे में सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार ही सबसे बेहतर रास्ता है।
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