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तेल के खेल में एक साथ भारत और रूस (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत एक बार फिर से पश्चिम एशिया से कच्चे तेल का आयात बढ़ा रहा है, लेकिन रूस की हिस्सेदारी अभी भी काफी ज्यादा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और नियामकीय दिक्कतों के चलते यह तेजी से बदल रहा है।
1-18 फरवरी के दौरान भारत का कुल कच्चे तेल का आयात औसतन 48.50 लाख टन बैरल प्रतिदिन था, जो जनवरी के 52.50 लाख बैरल प्रतिदिन से आठ प्रतिशत कम है। अमेरिका द्वारा रूस की तेल निर्यातकों इकाइयों पर प्रतिबंध लगाने से आयात में यह कमी आई।
शिपिंग ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि भारत का रूस का आयात दिसंबर, 2025 में 12.80 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर जनवरी में 12.20 लाख बैरल प्रतिदिन और फरवरी की शुरुआत में लगभग 10.90 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो महीने-दर-महीने लगभग 10 प्रतिशत कम है।
रूस से कितना कच्चा तेल खरीदेगा भारत?
रियल-टाइम ग्लोबल कमोडिटी इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स केप्लर में रिफाइनिंग एंड मॉडलिंग के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रिटोलिया ने कहा, “फरवरी में भारत में रूस का कच्चे तेल का आयात लगभग 10 से 12 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है और इसके मार्च में लगभग आठ लाख से 10 लाख बैरल तक रह जाने की उम्मीद है। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद छूट पर मिलने के चलते भारत ने रूस का कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था।“
रिटोलिया ने कहा कि सऊदी अरब से आयात फरवरी में 10 लाख से 11 लाख बैरल प्रतिदिन तक रह सकता है और यह नवंबर, 2019 के बाद से सबसे ज्यादा है। महीने-दर-महीने की आवक मार्च की शुरुआत में उम्मीद के मुताबिक लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन तक रह सकती है। मौजूदा ट्रेंड के हिसाब से सऊदी अरब फरवरी में भारत का शीर्ष आपूर्तिकर्ता है और उसके बाद रूस और इराक का नंबर आता है।
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