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24 घंटे सातों दिन हुआ काम, त्रुटियों पर होती रही निगरानी... रैपिड स्टेशन कारिडोर ने यूं लिया आकार

Chikheang 3 hour(s) ago views 1022
  



मेरठ। एनसीआरटीसी ने कारिडोर के निर्माण के समय वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (जीएनएसएस) बेस स्टेशनों के साथ निरंतर परिचालन संदर्भ स्टेशन (कोर्स) नेटवर्क का उपयोग किया। ये स्टेशन कारिडोर के साथ पांच से 10 किमी की दूरी पर 24 घंटे सातों दिन काम करते रहे। इससे त्रुटियों पर निगरानी होती रही। कोर्स तकनीक मापे गए स्थानों के लिए वास्तविक समय में सटीक निर्देश देती थी।

वहीं संचालन के लिए भारत के पहले नमो भारत कारिडोर के लिए यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) लेवल-टू लागू किया गया। इसमें ट्रैक और ट्रेन के बीच रेडियो संचार का उपयोग करते हुए आटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी), आटोमैटिक ट्रेन आपरेशन (एटीओ) और आटोमैटिक ट्रेन सुपरविजन (एटीएस) जैसी प्रणाली भी शामिल हैं। भारत में पहली बार ईटीसीएस लेवल-टू सिग्नलिंग का उपयोग किया जा रहा है।

इस तकनीक से चालक की त्रुटि के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। लांग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) ईटीसीएस सिग्नलिंग सिस्टम की सहायता से डेटा दर और लेटेंसी आवश्यकता पूरी की जाती है। इसमें उपयोग की गई एलटीई प्रणाली 300 किमी प्रति घंटे तक की उच्च गति में सहायक है। एलटीई सिस्टम को भविष्य में 5जी में अपग्रेड किया जा सकेगा। एलटीई बहुत कम लेटेंसी प्रदान करता है।
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