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बिहार में पराली जलाने वाले 1807 किसानों को बड़ा झटका, DBT से पैसा रोका; सरकारी लाभ से हुए वंचित

deltin33 3 hour(s) ago views 872
  

पराली जलाने वाले किसानों को झटका। (जागरण)



एजेंसी, पटना। बिहार में पराली जलाने वाले 1807 किसानों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया गया है। बिहार विधानसभा में एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 2025-26 में पराली जलाने की वजह से 1,807 किसानों का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) रजिस्ट्रेशन रोक दिया गया है।

फसल अवशेष जलाने के खिलाफ सरकार की एडवाइजरी का उल्लंघन करने पर 2025 में 1,758 किसानों की सब्सिडी और इंसेंटिव रोक दिए गए थे।

गौरतलब है कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए खेतों में फसल के अवशेष जालने की मनाही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक इसी तरह के उल्लंघन के लिए 49 और किसानों के DBT रजिस्ट्रेशन रोक दिए गए हैं।

इसमें कहा गया है कि DBT किसानों को अलग-अलग एग्रीकल्चर स्कीम के तहत सीधे फाइनेंशियल मदद पाने में मदद करता है। बिहार राज्य प्रदूषद नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण को रोकने और मिट्टी की उर्वरकता को नुकसान से बचाने के लिए पराली जलाने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है।

उन्होंने बताया, “सरकार ने सख्त चेतावनी दी थी कि जो किसान पराली जलाते हुए पाए जाएंगे, उन्हों सरकारी स्कीमों के तहत फाइनेंशियल मदद और सब्सिडी नहीं दी जाएगी। राज्य किसानों को रियायती दरों पर बिजली और सब्सिडी वाली कीमतों पर डीजल, और अन्य मदद देती है।“

उन्होंने किसानों से लोगों की हेल्थ और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार ने जागरूकता अभियान शुरू किए हैं और पराली जलाने से रोकने के लिए खेती के उपकरणों पर सब्सिडी दे रही है।
बायोमास ब्रिकेट बनाने के लिए दिया जा रहा बढ़ावा

देवेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि किसानों को बायोमास ब्रिकेट बनाने के लिए ग्रीन वेस्ट और दूसरे ऑर्गेनिक सामान बेचने के लिए भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “बायोमास ब्रिकेट, जो मुख्य रूप से ग्रीन वेस्ट और ऑर्गेनिक सामान से बने होते हैं, गर्मी और खाना पकाने के ईंधन के रूप में इस्तेमाल होते हैं। इन कम्प्रेस्ड कंपाउंड में कई तरह के ऑर्गेनिक सामान होते हैं।“

हाल ही में विधानसभा में पेश किए गए बिहार इकोनॉमिक सर्वे (2025-26) में बताया गया है कि 2024 में 4,596 किसानों के DBT रजिस्ट्रेशन रोक दिए गए थे। हालांकि, पिछले साल की तुलना में 2025 में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में कमी आई है।

सर्वे में बताया गया है कि जिले के अधिकारियों को कंबाइन हार्वेस्टर के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और फसल अवशेष जलाने के हॉटस्पॉट के रूप में पहचानी गई पंचायतों में कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।

कृषि विभाग ने फसल अवशेष जलाने के नुकसानदायक प्रभावों के बारे में किसानों और जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए एक इंटर-डिपार्टमेंटल वर्किंग ग्रुप बनाया है।

यह भी पढ़ें- दियारा के काला सोना पर ग्रहण, किसानों के अरमानों पर फिर रहा पानी
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