Falgun Vinayaka Chaturthi 2026: कब है विनायक चतुर्थी? (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गणेश जी (Lord Ganesha) को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनके नाम से ही होती है। फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को \“विनायक चतुर्थी\“ मनाई जाती है। साल 2026 में फाल्गुन मास की विनायक चतुर्थी बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फाल्गुन मास (Falgun Month) की इस चतुर्थी पर व्रत रखने और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न (बाधाएं) दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat 2026)
विनायक चतुर्थी की पूजा हमेशा दोपहर के समय की जाती है। पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में फाल्गुन विनायक चतुर्थी की तिथियां :
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 20 फरवरी 2026, दोपहर 02:38 बजे से
चतुर्थी तिथि का समापन: 21 फरवरी 2026, दोपहर 01:00 बजे तक
विनायक चतुर्थी मुख्य व्रत: 21 फरवरी 2026 (उदयातिथि के अनुसार)
पूजा का मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:27 से दोपहर 01:00 बजे तक
(Image Source: AI-Generated)
विशेष शुभ संयोग
इस बार फाल्गुन विनायक चतुर्थी पर \“सर्वार्थ सिद्धि योग\“ और \“रवि योग\“ जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि इन योगों में की गई पूजा और नए कार्यों की शुरुआत सफलता की गारंटी देती है। यह समय उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो लंबे समय से किसी काम के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।
कैसे करें पूजन? (Puja Vidhi)
भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए आप घर पर ही आसान तरीके से पूजा कर सकते हैं:
सुबह की शुरुआत: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें।
स्थापना: शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रिय वस्तुएं: बप्पा को दूर्वा (घास), सिंदूर, लाल फूल और अक्षत अर्पित करें।
भोग: गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग जरूर लगाएं। धार्मिक मान्यताओं में दूर्वा चढ़ाना सबसे अनिवार्य माना गया है।
कथा और आरती: पूजा के दौरान विनायक चतुर्थी की कथा सुनें और अंत में घी के दीपक से आरती करें।
ध्यान रखने योग्य बातें
विनायक चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन वर्जित माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन चांद देखने से कलंक लग सकता है, इसलिए भक्तों को रात के समय चंद्र दर्शन से बचना चाहिए।
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