दोषी मनोज उर्फ मनु।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। करीब आठ महीने पहले नाबालिग से दुष्कर्म कर उसकी हत्या का जघन्य अपराध करने वाले मनोज उर्फ मनु को अंतिम सांस तक जेल की सलाखों में रहने की सजा सुनाई गई है। साथ ही एक लाख 20 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) संख्या-एक अनिल कुमार ने सजा सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वाले अपराधियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती है।
अंगोछे से गला घोटा, पेट्रोल डाल शव को जलाया, नमक डालकर जमीन में गाड़ा
मनोज उर्फ मनु 17 जून, 2025 को गांव के ही 11 वर्षीय बालक को बहला-फुसलाकर ले गया। उसने भांग का सेवन करने के बाद बाजरे के खेत में बालक के साथ दुष्कर्म किया। पहचान उजागर होने के डर से अंगोछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। अपराध छिपाने के लिए खेत में गड्ढा खोदकर शव को पेट्रोल डालकर जलाने का प्रयास किया और साक्ष्य मिटाने के लिए उसपर नमक डालकर मिट्टी से दबा दिया।
18 जून को लिखाया गया था मुकदमा
बालक के घर न लौटने पर स्वजन ने तलाश की, लेकिन सुराग नहीं मिला। 18 जून, 2025 को बालक के पिता की तहरीर पर थाना इगलास में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस को एक अहम चश्मदीद गवाह मिला, जिसने बालक को अंतिम बार मनु के साथ जाते देखा था। पुलिस ने मनु को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इस दौरान उसने अपराध स्वीकार कर लिया।
कोर्ट ने कहा-मासूमों से दरिंदगी करने वालों के प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती
आरोपित की निशानदेही पर खेत से बालक का शव बरामद किया गया था। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण करने के बाद आरोपित को दोषी करार दिया और सजा सुनाई। |