जागरण संवाददाता, बांदा। बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न समेत गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए सिंचाई विभाग के निलंबित जेई व उसकी पत्नी को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अदालत में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो की अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले ने जिले में सख्त न्यायिक रुख को रेखांकित किया है। बताया जा रहा है कि बीते छह माह के भीतर इसी न्यायालय द्वारा यह तीसरी फांसी की सजा सुनाई गई है।
इससे पहले दो अन्य मामले में मासूम के साथ दुष्कर्म के आरोपितों को भी मृत्युदंड दिया जा चुका है। अब तक जनपद में कुल पांच मामलों में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। लगातार आ रहे कठोर फैसलों को न्यायपालिका की दृढ़ता और संवदेनशीलता के रूप में देखा जा रहा है, जिससे समाज में कड़ा संदेश गया है कि मासमों के खिलाफ अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
सितंबर 2025 में चिल्ला थाना क्षेत्र के एक गांव में दुष्कर्म के बाद मासूम बच्ची की हत्या के मामले में न्यायालय ने दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इस मामले में भी आरोप पत्र दाखिल होने के बाद से कुल 58 दिन में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई थी। बीते जनवरी माह में कालिंजर में दुष्कर्म की घटना के दोषी को फांसी की सजा मिली है। इससे पहले चिल्ला थाना के एक गांव में बच्ची के साथ दुष्कर्म व हत्या करने के दोषी को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।
इसके करीब एक वर्ष पहले मरका में हुई दुष्कर्म की घटना को लेकर भी दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। इसी तरह छोटा पुरवा नरसंहार को लेकर दोषी को न्यायालय से फांसी की सजा दी गई थी, जिसमें दो बच्चों की भी अभियुक्त के ऊपर हत्या करने का आरोप लगा था। इस प्रकार जिले में फांसी की यह पांचवीं सजा है। हालांकि पुराने मामलों में दोषी के स्वजन की ओर से मामले में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है, जिसमें फिलहाल अभी मामला विचाराधीन है।
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पाक्सो कोर्ट ने बनाया रिकार्ड
दुष्कर्म के मामले में छह माह में तीसरी बार पाक्सो कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। फांसी की सजा सुनाने वाले न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्र ने इसके पहले चिल्ला में मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या, कालिंजर में मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना में भी दोषी की फांसी की सजा सुनाई थी। प्रदीप कुमार मिश्र छह माह में तीसरी फांसी सुनाने वाले पहले जज बन गए हैं।
क्या कहना है लोगों का
दुष्कर्म और बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न जैसी जघन्य घटनाओं में इस प्रकार से सजा देना समाज में एक अच्छा संदेश है। ऐसी सजा समाज के लिए एक नजीर बनेगी।
कमल सिंह, शासकीय अधिवक्ता
जिले में न्याय विभाग बहुत तत्परता के साथ काम कर रहा है। इससे पहले कभी ऐसा मौका नहीं आया जबकि इतने कम दिनों में किसी को फांसी की सजा हुई है।
डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित, साहित्यकार
समाज में नैतिक मूल्यों का तेजी से पतन हो रहा है। दुष्कर्म की वारदातों में लगातार इजाफा हो रहा है। यदि इस प्रकार से न्याय व्यवस्था होगी तो अपराधियों में भी खौफ रहेगा और अपराध कम होंगे।
उमा शंकर पांडेय, पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित
अपराधियों को जल्द से जल्द सजा मिले, इसी उद्देश्य के साथ पुलिस अपना काम कर रहा है। जिले में इससे पहले भी दुष्कर्म के मामले में फांसी की सजा हो चुकी है।
पलाश बंसल, एसपी |