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मुजफ्फरपुर में वसूली गैंग का आतंक, पानी टंकी चौक से मिठनपुरा तक गिरोह सक्रिय

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मिठनपुरा रोड एमडीडीएम कालेज के पास सड़क की दोनो तरफ खुली दुकानें। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। पानी टंकी चौक से मिठनपुरा चौक तक वसूली गैंग सक्रिय है। यह गैंग सड़क की दोनों तरफ अवैध रूप से चल रही दो सौ से अधिक दुकानों से प्रति दुकानदार से पांच-पांच हजार रुपये प्रतिमाह की वसूली नगर निगम के नाम पर करता है। इतना ही नहीं इन दुकानदारों द्वारा सड़क पर फैलाए गए कचरे को साफ करने के लिए प्रति दुकान प्रति दिन पचास-पचास रुपये की वसूली करता है।

वसूली गैंग न सिर्फ अवैध दुकानदारों से मासिक उगाही करता है बल्कि नई अवैध दुकान खोलने के लिए जगह भी मुहैया कराता है। दुकानदारों में किसी प्रकार का विवाद होने पर उसका निपटारा करता है। नगर निगम के नाम पर हो रही वसूली के बाद भी नगर निगम प्रशासन मौन है। निगम प्रशासन शहर के अन्य भागों में तो अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाता है, लेकिन पानी टंकी चौक से मिठनपुरा चौक तक कभी अभियान नहीं चलाता।

वसूली गिरोह के संरक्षण में अतिक्रमणकारी लगातार अपना पांव फैला रहे हैं। पहले जहां दो-चार दुकान थीं अब बढ़कर दो सौ के करीब पहुंच गई हैं। अब तो एमडीडीएम कॉलेज के मुख्य द्वार तक अवैध दुकान लग चुकी हैं। शाम होने पर यह रोड पूरी तरह से अवैध दुकानों का हब बन जाता है। शहर के विभिन्न भागों से आए युवाओं का यहां चाय-पानी एवं फास्ट फूड खाने के नाम पर जमघट लगा रहता है।

एक दुकानदार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उसे हर माह यहां दुकान लगाने के लिए पांच हजार रुपये देना पड़ता है। सफाई के लिए अलग से राशि देनी होती है। एक दुकानदार ने निगम के एक पार्षद पति का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें ही राशि दी जाती है। इसके बदले में उसे जगह मिली है। उधर इस संबंध में महापौर निर्मला देवी ने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच करा कार्रवाई की जाएगी।
एमडीडीएम की प्राचार्य ने छात्राओं और कर्मचारियों की सुरक्षा पर जताया था खतरा

इलाके में अवैध रूप से खुली दुकानों से एमडीडीएम की पूर्व प्राचार्य डा. कनुप्रिया ने छात्राओं और कर्मचारियों, शिक्षकों को खतरा बताया था। एसडीओ पूर्वी को पत्र देकर उन्होंने इलाके से इस तरह की दुकानों को हटवाने का आग्रह किया था।

इसके बाद तत्कालीन एसडीओ पूर्वी अमित कुमार ने मुशहरी सीओ को अतिक्रमण हटाने के लिए कहा था, मगर स्थिति बेहतर होने की जगह खराब होती चली गई। ये दुकानें अब स्मैक का भी बड़ा अड्डा बन गई हैं। इसके बाद भी जिले का प्रशासनिक महकमा आंखें बंद किए हुए है। उसे शायद किसी अप्रिय घटना का इंतजार है।
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