इस तस्वीर का प्रयोग प्रतीकात्मक तस्वीर के रूप में किया गया है।
अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। धौलास में मुस्लिम शिक्षण संस्थान की जमीन खरीदने के विवाद में प्रशासन ने कुल 196 भू-स्वामियों को नोटिस जारी किए हैं। इसमें शुरूआती 15 नाम उन भू-स्वामियों के हैं, जिन्होंने सबसे पहले भूमि के बड़े टुकड़ों को शेखुल हिंद ट्रस्ट की पावर आफ अटार्नी से खरीदकर प्लाटिंग की।
इसके बाद 181 खरीदारों को कालोनी में छोटे प्लाट बेच दिए। अब 27 फरवरी को सुनवाई में क्रेता और विक्रेता आमने-सामने होंगे। दोनों पक्षों के बयान दर्ज कराए जाएंगे। तब यह पता चलेगा कि प्लाट बेचने में किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई या नहीं।
27 फरवरी की तिथि धौलास प्रकरण के लिहाज से बेहद अहम होगी। शेखुल हिंद एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के डा. महमूद मदनी से जुड़े इस मामले में न्यायालय बयानों के आधार पर यह देखेगा कि जमीन की खरीद-बिक्री में जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
नियमों की अनदेखी पाई गई तो जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 166-167 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
भूमि बेचने में तथ्य छिपाकर गुमराह तो नहीं किया
प्रशासन जांच कर रहा है कि ट्रस्ट की ओर से दी गई पावर आफ अटार्नी किन शर्तों पर दी गई थी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि भूमि विक्रय में ट्रस्ट की नियमावली का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
यह भी पता किया जा रहा है कि भूमि की बिक्री में कितना लाभ लिया गया। भूमि विक्रय के लिए ट्रस्टियों की अनुमति ली गई या नहीं।
इस पर भी गौर किया जा रहा है कि भूमि विक्रय में तथ्यों को छिपाकर खरीदारों को गुमराह तो नहीं किया गया। प्रशासन हाईकोर्ट से जुड़े निर्देशों के अनुपालन की भी पड़ताल कर रहा है।
ज्यादातर जमीन देहरादून के निवासियों ने खरीदी
धौलास में जिस जमीन को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसके अधिकांश खरीदार देहरादून के निवासी निकले हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में मध्यमवर्गीय परिवारों, नौकरीपेशा और छोटे निवेशकों ने प्लाट या कृषि भूमि के रूप में निवेश किया।
कई खरीदारों ने भविष्य में आवास निर्माण या दीर्घकालिक निवेश के उद्देश्य से जमीन ली थी। अब जांच और कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से ये खरीदार असमंजस में हैं। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता सिद्ध हुई तो उसका सीधा प्रभाव खरीदारों पर पड़ेगा।
सुनवाई में सभी लोग अपना पक्ष रखेंगे, जिला प्रशासन यह जांच करेगा कि धौलास में भूमि की खरीद खरीद फरोख्त लीगल है या नहीं। यह भी देखा जाएगा कि किन अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता थी। अवैध प्लाटिंग वहां पर कैसे की गई। जब जांच पूरी हो जाएगी उसके बाद सरकार आगे फैसला लेगी।’
--विनोद चमोली, विधायक
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